कर्ज में डूबे पाकिस्तान की बुरी हुई हालत, भूख से मरने की आई नौबत…

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नई दिल्ली: दुनिया को आतंकी देना वाला देश, भारत को युद्द के लिए ललकारने वाला पाकिस्तान अब भूख से मरने की कगार पर खड़ा हुआ है।  गले तक कर्ज में डूबे पाकिस्तान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। भ्रष्टाचार और कुशासन की वजह से इमरान सरकार से तंग आ चुकी जनता अब भूख से बिलबिला रही है। पड़ोसी देश में इन दिनों महंगाई चरम पर है। खाने-पीने की चीजें हद से ज्यादा महंगी हो गई हैं। आलम यह है कि गेहूं की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पाकिस्तान में एक किलो गेहूं के लिए लोगों को 60 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। द न्यूज के मुताबिक पाकिस्तान में 40 किलो के गेहूं के कट्टे की कीमत 2400 रुपए है। पहली बार देश में गेहूं की कीमत इस स्तर तक पहुंच गई है।

पिछले साल दिसंबर में भी गेहूं की कीमत इसी तरह काफी तेजी से बढ़ी थी, तब इसकी कीमत 50 रुपए प्रति किलोग्राम तक हुई थी। इस साल 5 अक्टूबर को गेहूं की कीमत 2400 रुपए प्रति 40 किलोग्राम तक पहुंच गई। ऑल पाकिस्तान फ्लोर असोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकारों से गेहूं का खरीद मूल्य तुरंत निर्धारित करने की मांग की है। फ्लोर असोसिएशन का कहना है कि देश में गेहूं की कमी मिल मालिकों की वजह से नहीं बल्कि प्रभावशाली लोगों की वजह से है।

मीडिया में बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार ने रूस से 200,000 मीट्रिक टन गेहूं आयात को मंजूरी दी है, जो इस महीने पहुंच सकता है। इस बीच नेशनल प्राइस मॉनिटरिंग कमिटी (NPMC) ने सोमवार को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में इजाफे की वजहों पर मंथन किया। बताया गया है कि यह बैठक पीएम इमरान खान के निर्देश पर हुई है।

ऐसा नहीं कि इस समय पाकिस्तान में सिर्फ गेहूं महंगा हुआ है, बल्कि टमाटर, आलू, ब्याज, चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं के दाम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। सब्जियों की कीमत भी बढ़ गई है। सितंबर 2020 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 9% रहा है। बैठक के दौरान यह भी बताया गया कि आलू, टमाटर और प्याज के थोक और खुदरा कीमतों में प्रॉफिट मार्जिन बहुत बढ़ गया है, जिसकी वजह से आम आदमी परेशान है।

पाकिस्तान में महंगाई का इस कदर बेकाबू होना यूं तो नई बात नहीं है, लेकिन इस बार बात अलग है। पाकिस्तान में इस समय इस तरह महंगाई बढ़ना इमरान खान को बेचैन इसलिए कर रहा है क्योंकि विपक्ष ने पहले ही महागठबंधन बनाकर सेना और इमरान खान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी महीने से व्यवस्था परिवर्तन के लिए देशव्यापी आंदोलन किए जाने हैं। माना जा रहा है कि महंगाई से बेचैन जनता विपक्ष के साथ सड़कों पर उतर सकती है।