जैविक हथियार बनाने की साजिश का पर्दाफाश।

कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर रहस्य का पर्दा नहीं उठ पा रहा है। जब दुनिया कोरोना के कहर से मौत के मुंह में समा रही है तो ऐसे में कोरोना की उत्पत्ति पर सवाल खड़े होना भी लाज़िमी हैं। चचीन के वुहान शहर से कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत होती है और देखते ही देखते पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का संक्रमण फैल जाता है लेकिन चीन के वुहान शहर के अलावा ये वायरस चीन के अन्य शहरों में आखिर क्यों नहीं फैला? क्या चीन कोरोना वायरस के रूप में एक जैविक हथियार तैयार कर रहा था?इसके संदर्भ में कई मत दिए गए। ‘वॉशिंगटन टाइम्स’ की रिपोर्ट की मानें तो कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर की एक प्रयोगशाला में जैविक हथियार बनाने के दौरान हुई गड़बड़ी के परिणामस्वरूप फैला। हालांकि किसी भी हेल्थ एजेंसी ने इस बात की पुष्टि नहीं की लेकिन चीन की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है जिसके तहत कोरोना वायरस को चीन की साजिश के रूप में जैविक हथियार बनाने का संकेत माना जा रहा है।

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कोरोना की उत्पत्ति के लिए चीन का अमेरिका पर शक

दुनिया में तांडव मचा रहे कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर जहां दुनिया के तमाम पीड़ित देश चीन पर शक कर रहे हैं तो वहीं चीन का शक अमेरिका पर है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का आरोप है कि अक्टूबर में चीन के वुहान शहर में विश्व सैन्य खेल के आयोजन के दौरान अमेरिकी सेना ने साजिश के तहत इस वायरस को प्लांट किया जिसके बाद से ही वुहान में कोरोना वायरस फैलने लगा। अमेरिका पर शक जताने वाले देशों में चीन अकेला नहीं बल्कि रूस और ईरान भी अमेरिका पर शक जता रहे हैं। हालांकि अमेरिका ने जब रूस पर अमेरिका पर आरोप लगाने का मुद्दा उठाया तो रूस के विदेश मंत्री ने इस बात का खंडन कर दिया। वहीं पूर्व ईरानी राष्ट्रपति महमदू अहमदीनेजाद ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र देकर दावा किया कि अमेरिका द्वारा कोरोना वायरस को लैब में पैदा किया गया है जिससे वो दुनिया पर वर्चस्व स्थापित कर सके।

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चीन और अमेरिका के बीच बढ़ी तल्खी

दरअसल चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस के चलते चीन पर संदेह जताया जाने लगा। तो वहीं चीन कोरोना को प्लांट करने का आरोप अमेरिका पर लगा रहा था। इन्ही सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट ने चीन में खलबली मचा दी। ट्रंप ने अपने ट्वीट में कोरोना वायरस को ‘चीनी वायरस’ नाम से संबोधित किया जिसपर चीन बौखला गया और इस शब्द पर कड़ी आपत्ति जताई। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका को चेतावनी तक दे डाली और कहा कि कि चीन को गाली देने से पहले आप अपने काम पर ध्यान दें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी

जिस संकट की घड़ी से दुनिया गुज़र रही है उस वक्त एक-दूसरे देश पर कोरोना वायरस फैलाने के आरोप लगाने की कड़ी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी कि कोरोना वायरस को किसी खास समूह या क्षेत्र से जोड़ना गलत है।

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वैज्ञानिक शोध में चीन आरोपों से बरी

एक-दूसरे देश पर कोरोना वायरस की उत्पत्ति के आरोपों को कई देश के वैज्ञानिकों ने खारिज कर दिया है। स्क्रीप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक शोध को नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित किया गया। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, ब्रिटेन के वेलकम ट्रस्ट, यूरोपीय रिसर्च काउंसिल और ऑस्ट्रेलियन लौरेट काउंसिल ने इस शोध के लिए आर्थिक मदद की। स्क्रीप्स इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर कक्रिस्टीन एंडरसन ने शोध के पश्चात प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर दावा किया कि कोविड-19 लैब में नहीं बनाया गया है जैसा कि जैविक हथियार के रूप में इसके इस्तेमाल के आरोप लगाए जा रहे थे। इसके अलावा उन्होने स्पष्ट किया कि कोविड-19 की प्राकृतिक रूप से क्रमागत उन्नति हुई है।

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