उत्तर प्रदेश के वो हत्याकांड जिनसे हिल गई योगी सरकार

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योगी शासन के दौरान कई ऐसे हत्या के मामले सामने आए जिन्होंने सरकार को हिला कर रख दिया।

19 मार्च को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को सत्ता संभालते हुए तीन साल पूरे हो जाएंगे। इस सरकार ने सत्ता पर काबिज होते ही पुलिस को अपराधियों के सफाए का फरमान जारी किया था। जिसका नतीजा ये निकला की प्रदेश में पुलिस द्वारा ताबड़तोड़ एनकाउंटर किए गए। सैकड़ो अपराधियों पर पुलिस ने शिकंजा कसा। लेकिन योगी शासन के दौरान कई ऐसे हत्या के मामले सामने आए जिन्होंने सरकार को हिला कर रख दिया वहीं यूपी पुलिस के किसी चुनौती से कम नहीं थे। तो चलिए बताते हैं कौन से है वो मामले।

सोनभद्र में जमीनी विवाद को लेकर नरसंहार

7 जुलाई 2019 का वो दिन था जब सोनभद्र जिले का एक गांव नरसंहार से दहल गया। इस नरसंहार में 10 लोगों की जान चली गई थी। तो वहीं, दो दर्जन से ज्यादा लोगों की जान पर खतरे के बादल मंडरा रहे थे। लोग अपने गांव में डरे-सहमे थे। इस खौफनाक मंजर का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वायरल हुए वीडियो में कुछ लोगों पर 200 से ज्यादा हमलावर हाथों में बंदूक, डंडे के साथ हमला करते नजर आ रहे थे। साथ ही वीडियो में खेतों में मौजूद लोग भागते हुए नजर आ रहे थे और गोलियां चलती दिखाई दी थीं। पूरे राज्य सरकार को इस खूनी नरसंहार ने हिलाकर रख दिया। पुलिस के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया था.

विवेक तिवारी हत्याकांड

विवेक तिवारी लखनऊ में एपल के एरिया मैनेजर थे। 28 सितंबर 2018 की उस रात विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना को छोड़ने अपनी एक्सयूवी से जा रहे थे। तभी करीब डेढ़ बजे दो बाइक सवार पुलिसकर्मियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने विवेक को उन्हें रुकने का इशारा किया था। वहीं जब वो नहीं रुके तो सिपाही प्रशांत चौधरी ने विवेक को निशाना बनाते हुए गोली चला दी थी। पुलिस की गोली लगने के बाद विवेक की मौत हो जाती है। जबकि सना इस हमले में बाल-बाल बच जाती है। इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया गया था। दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विवेक की सहकर्मी सना और उनकी पत्नी कल्पना ने FIR कराई थी। इस चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड के एक आरोपी संदीप कुमार की जमानत 16 अप्रैल 2019 को हाई कोर्ट ने मंजूर कर ली। बता दें, संदीप के खिलाफ मुख्य आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को उकसाने के साक्ष्य नहीं मिले थे। इसी के आधार पर हाईकोर्ट ने उसे जमानत दे दी थी।

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कट्टरपंथी हिंदू नेता कमलेश तिवारी का मर्डर

हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी का यूपी की राजधानी लखनऊ में ही गला रेत दिया गया था। इलाज के दौरान ट्रामा सेंटर में कमलेश तिवारी की मौत हो गई थी। चाय पीने आए बदमाश खुर्शीद बाग स्थित हिंदू समाज पार्टी कार्यालय में मिठाई के डिब्बे में चाकू और तमंचा लेकर आए थे। वहीं घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश फरार हो गए। जिसके बाद पुलिस टीम फोन की डिटेल खंगालने के साथ ही सर्विलांस की मदद से आरोपी बदमाशों का पता लगाने में जुट गई थी। बता दें दिसंबर, 2015 में पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी ने विवादित बयान दिया था। जिसे लेकर काफी हंगामा हुआ था, इस विवादित बयान के चलते उनकी गिरफ्तारी हुई थी। वह फिलहाल जमानत पर रिहा चल रहे थे। हाल ही में कमलेश तिवारी पर लगी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हटा दिया था।

हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रणजीत बच्चन की हत्या

1 फरवरी 2020 ये वो दिन था जब कट्टरपंथी रणजीत बच्चन को बाइक सवार हमलावरों द्वारा सिर पर गोली मारी गई थी। ये घटना हजरतगंज इलाके में ग्लोबल पार्क के पास हुई। रणजीत पर फायरिंग के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। जिसके बाद तुरंत बच्चन को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। रणजीत के छोटे भाई आदित्य, जो घटना के समय उनके साथ थे, उन्हें भी बदमाशों की गोली लगी थी। इस हत्या के बाद दो पीआरवी पुलिसकर्मियों, एक कांस्टेबल और एक चौकी प्रभारी समेत चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। पुलिस ने हत्या से जुड़े संदिग्ध की सीसीटीवी फुटेज भी जारी की थी साथ ही संदिग्ध के ठिकाने की जानकारी के लिए 50,000 पये के इनाम की भी घोषणा की थी। हालांकि, कुछ दिन बाद पुलिस ने रंजीत बच्चन की हत्या का खुलासा करते हुए कहा था कि कत्ल के पीछे कोई और नहीं बल्कि रंजीत की दूसरी पत्नी और उसके ब्वॉयफ्रेंड का हाथ था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। स्मृति, रंजीत की दूसरी पत्नी है। दोनों के बीच तलाक के मामले को लेकर विवाद चल रहा था जिससे स्मृति परेशान थी। इसी दौरान उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया था।

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फर्रुखाबाद बंधक संकट और एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के करसिया ग्राम में 30 जनवरी 2020 के दिन एक शख्स ने 20 बच्चों को अपने घर में बंधक बना लिया था। बंधक बनाने वाले आरोपी शख्स की पहचान सुभाष बाथम के रूप में हुई थी। वहीं जब मासूमों को बंधक बनाने की फर्रुखाबाद के एसपी और एएसपी को लगी तो भारी पुलिस फोर्स के साथ सभी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने आरोपी के घर को चारों तरफ से घेर लिया था। आरोपी सुभाष अपने घर के अंदर से विधायक और एसपी को गेट के बाहर बुलाने का दबाव बना रहा था। ये ख़बर आग की बहुत तेजी से फैल गई थी। जिसके बाद सीएम योगी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आपात बैठक बुलाई थी। साथ ही फर्रुखाबाद के डीएम और एसएसपी से भी बात की थी। वहीं आरोपी सुभाष को जब ग्रामीण बालू दुबे ने गेट के पास जाकर समझाने की कोशिश की, तो उसने तमंचे से उसके ऊपर गोली चला दी। आरोपी सुभाष द्वारा चलाई गई गोली बालू दुबे के पैर में लगी, जिसमें वो घायल हो गया। इस पूरी घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल था। वहीं कई घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस ने देर रात सुभाष को एनकाउंटर में मौत के घाट उतार दिया। जबकि उसकी पत्नी को गुस्साए गांववालों ने पुलिस के सामने पीट-पीटकर मार डाला था।

नोएडा का गौरव चंदेल मर्डर केस

6 जनवरी 2020 कत्ल की खौफनाक वारदात जब गुरुग्राम की एक एमएनसी में काम करने वाले गौरव चंदेल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद उनकी लाश 6 जनवरी की देर रात नोएडा के थाना फेस-3 क्षेत्र में पर्थला चौक से आगे सर्विस रोड पर मिली थी। इस मामले में पुलिस की बड़ी लापरवाही देखने को मिली थी क्योंकि जब चंदेल के परिजन मामला दर्ज कराने थाना गए तो पुलिस ने उन्हें बैरंग वापस भेज दिया था। बाद में परिजनों ने खुद ही उनका शव बरामद किया। मामले का संज्ञान उच्च अधिकारियों को लेना पड़ा और इसमें कई पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त भी किया गया था। पुलिस ने हत्या मामले के 9 दिन बाद चंदेल की कार बरामद की थी। ये कार घटनास्थल से 40 किलोमीटर दूर खड़ी बरामद हुई थी। इस हत्याकांड मामले में एक बड़े गिरोह का नाम प्रकाश में आया था। जिसके कुछ सदस्यों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। लेकिन इस पूरे मामले में यूपी पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी।

यूपी बार कॉउंसिल की अध्यक्ष का मर्डर

आगरा की दीवानी कचहरी में स्वागत समारोह के दौरान 12 जून 2018 को मनीष ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की नवनिर्वाचित अध्यक्ष दरवेश यादव की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अधिवक्ता मनीष ने कार्यक्रम के बाद एक वरिष्ठ अधिवक्ता की केबिन में अचानक पिस्तौल निकाली। इससे पहले कि आसपास के अधिवक्ता कुछ समझ पाते, मनीष ने दरवेश पर फायर झोंक दिया था। मनीष ने दरवेश को तीन गोली मारी थी जिसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली थी। इस पूरी घटना के बाद उपचार के लिए मनीष को सिकंदरा हाइवे स्थित रेनबो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां से हालत बिगड़ने पर उसे मेदांता अस्पताल ले जाया गया, लेकिन ऑपरेशन के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। लेकिन मनीष ने दरवेश की हत्या क्यों की, ये अभी तक राज ही बना हुआ है। पुलिस के लिए ये मामला सिरदर्द साबित हुआ।

बीजेपी नेता चिन्मयानंद पर गंभीर आरोप

यूपी में बीजेपी सरकार के आगे उस वक्त अजीब स्थिति पैदा हो गई, जब सेंगर की तरह पूर्व गृह मंत्री और भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद को यौन उत्पीड़न के मामले में हिरासत में लिया गया। उनके ही कॉलेज स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा का यौन शोषण करने का आरोप चिन्मयानंद पर लगाया गया था। जिसके बाद उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इस मामले की एसआईटी जांच जारी है। इससे पहले पिछले महीने शाहजहांपुर में एलएलएम छात्रा के साथ यौन शोषण के आरोप में कई महीनों से जेल में बंद पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद की इलाहाबाद हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन कुछ दिन पहले अदालत की ओर से इन्हें जमानत दे दी है। पहले 16 नवंबर 2019 को हाई कोर्ट ने उनकी जमानत पर फैसला सुरक्षित कर लिया था।

हत्याकांड का दोषी निकला बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर

उत्तर प्रदेश के चर्चीत रेप कांड में शामिल उन्नाव रेप केस में पीड़िता के पिता की हत्या के मामले दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत सातों दोषियों को 10 साल की सजा के साथ ही 10-10 लाख का जुर्माना भी लगाया है। सीबीआई की ने इस मामले में दोषियों के लिए ज्यादा से ज्यादा सजा की मांग की थी। यहां आपको ये बता दें कि, इससे पहले उन्नाव रेप केस मामले में CBI की विशेष अदालत ने भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ये दूसरी FIR थी, जिसमें कोर्ट ने सजा सुनाई है।

बताते चलें कि पीड़िता के पिता अपने एक साथी के साथ गांव लौट रहे थे, उसी दौरान शशि प्रताप सिंह नाम का एक युवक उनसे लिफ्ट मांगता है,। लेकिन जब उन्होंने इंकार किया तो दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इसके बाद सिंह ने अपने साथियों को बुलाता है, जिनमें सेंगर का भाई अतुल भी शामिल था। इन लोगों द्वारा पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटा जाता है जिसके बाद गंभीर रूप से घायल पीड़िता के पिता को अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस स्टेशन ले जाया गया जहां दो दिन बाद उनकी मौत (9 अप्रैल, 2018 को) पुलिस हिरासत में हो गई थी। इस मामले में यूपी सरकार की भूमिका पर काफी सवाल खड़े हुए थे।

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