कौन ज्यादा घातक ‘कोरोना’ या ‘भुखमरी’?

लॉक डाउन की स्थिति में कमाई का जरिया भी बंद है ऐसे में अब करें तो क्या करें कोरोना के प्रकोप से बच भी गए तो कहीं भुखमरी से जान न चली जाए।

कोरोना से बचाव के लिए लॉक डाउन तो कर दिया गया है लेकिन उनका क्या जो रोज खून पसीने की कमाई लेकर घर पहुंचते हैं और तब जाकर उनके घर में चूल्हा जलता है। लॉक डाउन की स्थिति में कमाई का जरिया भी बंद है ऐसे में अब करें तो क्या करें कोरोना के प्रकोप से बच भी गए तो कहीं भुखमरी से जान न चली जाए। गरीब परिवारों के माथे की शिकन साफ बता रही है कि कोरोना से कहीं ज्यादा उन्हे चिंता अपने परिवार का पेट पालने की है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है बस जागरूक होने की जरूरत है क्योंकि ये मुश्किल घड़ी में चुनौती सरकार के सामने सबसे बड़ी है और ऐसा नहीं है कि सरकार ने लॉक डाउन के ऐलान से पहले हर तबके के बारे में सोचा नहीं।

लॉक डाउन की स्थिति में गरीब परिवारों को किस तरह मदद पहुंचायेगी सरकार?

लॉक डाउन से घबराने की जरूरत नहीं डट कर मुकाबला करने की है। वो परिवार जो आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और ऐसे समय में राशन की व्यवस्था नहीं कर सकते उनके लिए सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं । लॉक डाउन की स्थिति को देखते हुए कई राज्यों की सरकार ने राशन में छूट का ऐलान किया है। अब मन में सवाल उठते हैं कि अगर सरकार को लॉक डाउन ककी अवधि को बढ़ाना पड़ता है तो आखिर कब तक सरकार असहाय परिवारों का पेट भर पाएगी तो चलिए आपको रूबरू कराते हैं फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से ।

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क्या कहती है फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट

फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास 1 साल तक के लिए भरपूर राशन का भंडार है जिसे इस मुश्किल घड़ी में गरीबों के लिए राशन की व्यवस्था करने में इस्तेमालल किया जा सकता है। इसके साथ ही आने वाली नई फसल के साथ इस भंडार में और भी अधिक इज़ाफा हो जाएगा तो राशन को लेकर चिंता का विषय नहीं है लेकिन जमाखोरी और कालाबाजारी की मार गरीब परिवारों के निवाले पर डाका डाल सकती है। आइए जानते हैं कैसे?

जमाखोरी और कालाबाजारी से कैसे निपटेगा गरीब परिवार?

लॉक डाउन की स्थिति में सरकार जनता की हर संभव मदद करने को तत्पर है और पूरी तरह निगरानी भी कर रही है लेकिन जब समय की पाबंदी हो और खरीददारों की लंबी लाइन तो दुकानदारों के पास अपनी स्थिति सुधारने का एकमात्र विकल्प होता है कालाबाजारी यानि कि उत्पाद को मनमाफिक दामों पर बेचना या फिर उस सामान का स्टॉक करना जिससे जनता अपना जरूरत का सामान दुकानदार की मंशी के अनुरूप दामों पर खरीदने को मजबूर हो जाए। यही वो कारण है जिसकी वजह से गरीब परिवार भुखमरी की चपेट में आ सकता है। हालांकि तमाम राज्यों से आई शिकायतों के बाद राज्य सरकारों ने कई हेल्पलाइन नं. भी जारी किए लेकिन बावजूद इसके कालाबाजारी जारी है। सरकार और प्रशासन को इस वक्त सख्त रुख अपनाने की जरूरत है जिससे आम आदमी औरर गरीब परिवार की जेब पर महंगाई की मार न पड़ सके और कोरोना वायरस की जंग भूखे पेट न लड़नी पड़े।

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