मदरसे के बच्चों को अब मिलेगी सामान्य शिक्षा

एक मदरसे में पढ़ने वाला छात्र कितना भी होनहार क्यों न हो वो सामान्य शिक्षा हासिल करने वाले बच्चे की तुलना में कम ही आंका जाता है। शायद सही भी है मदरसों में धार्मिक ज्ञान तो स्कूलों में सामान्य पढ़ाई कराई जाती है जिसके सहारे एक बच्चा अपना और अपने परिवार का भविष्य तय करता है। कहना गलत नही होगा कि एक कामयाब जीवन जीने के लिए किसी भी इंसान को स्कूली शिक्षा की बेहद ज़रुरत होती है। इन सब बातों पर गौर करते हुए असम सरकार ने सरकारी खर्च पर चल रहे मदरसों को स्कूलों में बदलने का फैसला किया है।

सरकारी खर्च पर चल रहे मदरसों को बंद करने के असम सरकार के फैसले पर मचे बवाल के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि केवल सरकारी मदरसों को स्कूलों में बदला जाएगा, प्राइवेट मदरसों को बंद करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि मदरसा शिक्षा और सामान्य शिक्षा की बराबरी को खत्म कर दिया जाएगा।

असम के मंत्री ने कहा, ”हम मदरसा बोर्ड को भंग कर देंगे। हम उस नोटिफिकेशन को वापस लेंगे जो मदरसा शिक्षा को सामान्य शिक्षा के बराबर का दर्जा देता है। हम राज्य के सभी सरकारी मदरसा को जनरल स्कूल में तब्दील करेंगे।” हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य में प्राइवेट मदरसों को बंद नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने कहा, ”हम रेग्युलेशन ला रहे हैं। छात्रों को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि वे मदरसा में क्यों हैं, उन्हें पाठ्यक्रम में विज्ञान और गणित को शामिल करना होगा। उन्हें राज्य के साथ खुद को रजिस्टर करना होगा।” दरअसल, असम सरकार ने नवंबर से सरकारी खर्चे पर राज्य में चल रहे मदरसों को बंद करे का फैसला किया है। सरकार की दलील है कि सरकारी खर्चे पर कुरान की पढ़ाई क्यों कराई जाए। हालांकि, सरकार 100 संस्कृत विद्यालयों को भी बंद करना चाहती है।

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