कोरोना को तोड़ने में भारत ने हासिल की सफलता

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भारत के हाथ बड़ी सफलता लगी है, भारतीय वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के स्ट्रेन्स को अलग करने में सफलता हासिल की है।

चीन ही नहीं पूरी दुनिया पर कहर बरसा रहे कोरोना का तोड़ निकालने के लिए सभी देश जी जान से लगे हुए हैं। इस बीच भारत के हाथ बड़ी सफलता लगी है। कोरोनावायरस के स्ट्रेन्स (अलग-अलग रूप) को अलग करने में भारतीय वैज्ञानिकों ने सफलता हासिल कर ली है। जिससे इस वायरस को लेकर दवाई और टीके बनाने में सहायता मिलेगी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार, कई वैज्ञानिक काफी समय से कोरोना वायरस को लेकर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कोरोना वायरस के स्ट्रेन को अलग करने में पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी (एनआईवी) के वैज्ञानिकों ने कामयाबी पाई है।

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माना जा रहा है, वैज्ञानिकों द्वारा की गई ये खोज वायरस के रोकथाम में काफी सहायक साबित होगी। वायरस के स्ट्रेन्स को अलग करने से वायरस की जांच के लिए किट बनाने में भी काफी सहायता मिलेगी। यही नहीं इससे किट बनाने, टीके का शोध करने और दवा का पता लगाने में काफी मदद मिलेगी। मिली जानकारी के अनुसार, कोविड-19 को लेकर अभी तक कुल चार देशों को ये कामयाबी प्राप्त की है। इन देशों में अमेरिका, जापान, थाईलैंड और चीन शामिल हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार  आईसीएमआर पुणे की वैज्ञानिक प्रिया अब्राहम का कहना है, ‘कोरोना वायरस को लेकर भारत ने अभी पहला चरण पार कर किया है’।

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उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, ‘आगरा के 6 मरीज और इटली के कुछ नागरिकों से मिले वायरस को वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए वायरस के स्ट्रेन को अलग (आइसोलेट) किया गया था. इसके बाद, उस स्ट्रेन को वुहान कोरोना वायरस के स्ट्रेन से मिलाया गया’। वैज्ञानिकों ने जांच में प्राप्त किया कि इन दोनों वायरसों के स्ट्रेन के बीच 99.98% की समानता है। वैज्ञानिक प्रिया अब्राहम का कहना है, ‘किसी बीमारी की खत्म करने या रोकने के लिए उसकी पहचान करना जरूरी है. ये एक तरह से यह पहला चरण कहलाता है. इसके बाद टीके और उपचार आदि के लिए काम किया जाता है’। वहीं वैज्ञानिकों द्वारा पाई गई इस सफलता के बाद वायरस के स्ट्रेन को अलग करने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश बन गया है।

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