इसलिए प्रिय थी भगवान कृष्ण को ये चीज़ें, जानें इनका महत्त्व

बचपन से हम सभी टीवी या तस्वीरों में देखते आ रहे हैं कि भगवान कृष्ण बाल अवस्था से ही कुछ चीज़े अपने पास रखते थे या कुछ चीज़ों को बहुत पसंद करते थे। जिनमें कुछ चीज़े प्रमुख थी जैसे बांसुरी, मोरपंख, कमल, माखन मिश्री, वैजयंती माला आदि। ये सभी चीज़े श्री कृष्ण को बेहद प्रिय थीं। ये सिर्फ सुंदरता बढ़ाने की चीज़ें ही नही थीं बल्कि इन चीज़ों से बहुत सी बातें सीखने को मिलती हैं। जिनसे सीख लेकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं।

जानें महत्त्व – श्रीकृष्ण भारतीय जनमानस के ऐसे नायक हैं जिनका चरित्र दार्शनिक होने के साथ-साथ बहुत ही व्यवहारिक है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण अपने साथ ऐसी चीजें रखते है जो जनसाधारण के लिए कुछ न कुछ सन्देश अवश्य देती हैं।

मोरपंख – शास्त्रों में मोर को चिर-ब्रह्मचर्य युक्त जीव समझा जाता है। अतः प्रेम में ब्रह्मचर्य की महान भावना को समाहित करने के प्रतीक रूप में कृष्ण मोरपंख धारण करते हैं। मोर मुकुट का गहरा रंग दुख और कठिनाइयों, हल्का रंग सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे घर में रखने से सकारात्मक ऊर्जा तो आती ही है, ग्रहदोष भी शांत हो जाते हैं। मोरपंख में सभी देवी-देवताओं का वास माना गया है। ज्योतिष और वास्तु में मोरपंख को सभी नौ ग्रहों का प्रतिनिधि माना गया है।

क्यों नीला है भगवान कृष्ण का रंग

वैजयंती माला – वैजयंती माला कमल के बीजों से बनी होती है। दरअसल, कमल के बीज बहुत सख्त होते हैं। कभी टूटते नहीं, सड़ते नहीं, हमेशा चमकदार बने रहते हैं। इसका तात्पर्य है, जब तक जीवन है, तब तक ऐसे रहो जिससे तुम्हें देखकर कोई दुखी न हो। दूसरा यह माला बीज है, जिसकी मंजिल होती है भूमि। इस माला के माध्यम से श्री कृष्ण सन्देश देते हैं, कि जमीन से जुड़े रहो, कितने भी बड़े क्यों न बन जाओ। अहंकार से दूर रहो, हमेशा अपने अस्तित्व की असलियत के नजदीक रहो।

माखन मिश्री – मिश्री का एक महत्वपूर्ण गुण यह है कि जब इसे माखन में मिलाया जाता है, तो उसकी मिठास माखन के कण-कण में घुल जाती है। माखन के प्रत्येक हिस्से में मिश्री की मिठास समा जाती है। मिश्री युक्त माखन जीवन और व्यवहार में प्रेम को अपनाने का संदेश देता है। यह बताता है कि प्रेम में किस प्रकार से घुल मिल जाना चाहिए।

बांसुरी – प्रेम और शांति का संदेश देने वाली बांस की बांसुरी श्री कृष्ण की शक्ति थी। इसलिए ही भगवान श्री कृष्ण हर पल बांसुरी को अपने साथ रखते थे। बांसुरी सम्मोहन, ख़ुशी व आकर्षण का प्रतीक मानी गई है। हर कोई इसकी मधुर धुन से आकर्षित हो जाता है। बांसुरी बजाने पर उससे उत्पन्न होने वाली ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है एवं वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन में आनंद की अनुभूति होती है। बांसुरी में तीन गुण हैं। पहला बांसुरी में गांठ नहीं है। जो इस बात की ओर इशारा करती है कि अपने अंदर किसी भी प्रकार की गांठ मत रखो मतलब मन में बदले की भावना मत रखो। दूसरा बिना बजाये यह बजती नहीं है, मानो यह समझा रही है कि जब तक न कहा जाए तब तक मत बोलो। तीसरा जब भी बजती है मधुर ही बजती है। जिसका अर्थ हुआ जब भी बोलो,जो भी बोलो मीठा ही बोलो।

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