विपक्ष के निशाने पर योगी सरकार, मजदूरों पर सैनिटाइजर छिड़कना पड़ा भारी

दिल्ली से आ रहे मजदूरों को जिला प्रशासन ने सैनिटाइजर से नहलाया था। इस बीच योगी सरकार और यूपी पुलिस की निंदा की जा रही थी।

जहां एक तरफ पूरा देश कोरोना वायस की चपेट में आ रहा है वहीं यूपी के बरेली में दिल्ली से आ रहे मजदूरों को जिला प्रशासन ने सैनिटाइजर से नहलाया था। इस बीच योगी सरकार और यूपी पुलिस की निंदा की जा रही थी। जिसके बाद अब जिला प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। वहीं जिलाधिकारी ने इसे अतिसक्रियता बताते हुए अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश कि है और जो इसके जिम्मेदार हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।

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इस बात को उठाते हुअ बरेली के जिलाधिकारी ने कहा कि, “इस वीडियो की पड़ताल की गई, प्रभावित लोगों का सीएमओ के निर्देशन में उपचार किया जा रहा है। बरेली नगर निगम एवं फायर ब्रिगेड की टीम को बसों को सैनेटाइज़ करने के निर्देश थे, पर अति सक्रियता के चलते उन्होंने ऐसा कर दिया। सम्बंधित के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।“

जानिए क्या है पूरा मामला

बता दें, ये मजदूर दिल्ली से बरेली लौट रहे थे, और जब ये बरेली के बस अड्डे पर बस का इंतजार कर रहे थे, तभी वहां पुलिस पहुंची और सब मजदूरों को एक लाइन में बैठाकर सैनिटाइजर का छिड़काव किया। जिसके बाद किसी मजदूर के आंख लाल हुए तो कई मजदूरों को असहज महसूस हुआ। वहीं कुछ छोटे बच्चे रोने लगे।

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विपक्ष ने योगी सरकार पर साधा निशाना

वहीं इस मामले के बाद विपक्ष के लोगों ने भी योगी सरकार की जमकर निंदा की और इन सब के की जिम्मेदार ठहराया है। वहीं इस मामले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा, “यूपी सरकार से गुजारिश है कि हम सब मिलकर इस आपदा के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन कृपा करके ऐसे अमानवीय काम मत करिए. मजदूरों ने पहले से ही बहुत दुख झेल लिए हैं. उनको केमिकल डाल कर इस तरह नहलाइए मत. इससे उनका बचाव नहीं होगा बल्कि उनकी सेहत के लिए और खतरे पैदा हो जाएंगे.”

वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि, “यात्रियों पर सेनिटाइज़ेशन के लिए किए गए केमिकल छिड़काव से उठे कुछ सवाल, क्या इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश हैं? केमिकल से हो रही जलन का क्या इलाज है? भीगे लोगों के कपड़े बदलने की क्या व्यवस्था है? साथ में भीगे खाने के सामान की क्या वैकल्पिक व्यवस्था है.”

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