धार्मिक स्थल को लेकर उद्धव-कोश्यारी आमने-सामने

महाराष्ट्र में कोरोना के चलते धार्मिक स्थल बंद है. वही धार्मिक स्थल खोलने को लेकर एक विवाद शुरू हो गया है..इसी को लेकर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के बाद राजनीति शुरू हो गई है।  सिसायत के लिए ज्यादा कुछ नही चाहिए होता. जरूरत  होती है एक मुद्दे की जिसके बाद  सियासत  को रंग मिलना शुरू हो जाता है अब आपको बताते है की आखिर राज्यपाल कोश्यारी ने पत्र में क्या कहा था? महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर धार्मिक स्थलों को खोलने के लिए कहा है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि 1 जून से आपने मिशन फिर से शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन चार महीने बाद भी पूजा स्थल नहीं खोले जा सके हैं.राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि यह विडंबना है कि एक तरफ सरकार ने बार और रेस्तरां खोले हैं, लेकिन दूसरी तरफ, देवी और देवताओं के स्थल को नहीं खोला गया है. आप हिंदुत्व के मजबूत पक्षधर रहे हैं. आपने भगवान राम के लिए सार्वजनिक रूप से अपनी भक्ति व्यक्त की.क्या आपने अचानक खुद को धर्मनिरपेक्ष बना लिया है? द्धव ने किया पलटवार

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राज्यपाल के लेटर लिखने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा है, ”जैसा कि अचानक से लॉकडाउन को लागू करना सही नहीं था, एक बार में इसे पूरी तरह से हटाना भी अच्छी बात नहीं होगी. और हां, मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो हिंदुत्व का पालन करता है, मेरे हिंदुत्व को आपके सत्यापन की जरूरत नहीं है.’ दरसल आपको बता भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के नामती चेताबागड़ गांव में हुआ था. महाराष्ट्र के राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाल रहे कोश्यारी बीजेपी को उत्तराखंड में स्थापित करने वाले उन नेताओं में शुमार किया जाता है. जिन्होने अपनी पूरी जिन्दगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि (आरएसएस) और बीजेपी को समर्पित किया है. भगत सिंह कोश्यारी ने छात्र जिन्दगी में ही राजनीति में कदम रख दिया था. 1961 में कोश्यारी अल्मोड़ा कॉलेज में छात्रसंघ के महासचिव चुने गए. इंदिरा गांधी के द्वारा देश में 1975 में लगाए गए आपातकाल का कोश्यारी ने विरोध किया, जिसके चलते उन्हें करीब पौने दो साल तक जेल में रहना पड़ा. 23 मार्च 1977 को रिहा हुए, जिससे उन्हें राजनीतिक पहचान मिली.

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उत्तराखंड के 2002 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हार जाने के बाद कोश्यारी ने 2002 से 2007 तक विधानसभा में नेता विपक्ष की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद उन्होंने 2007 से 2009 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली, इसी दौरान 2007 में बीजेपी की उत्तराखंड की सत्ता में वापसी हुई. लेकिन पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया. और  2008 से 2014 तक उत्तराखंड से राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे. 2014 में बीजेपी ने नैनीताल सीट संसदीय सीट से उन्हें मैदान में उतारा और वो जीतकर पहली बार लोकसभा सदस्य चुने गए, लेकिन 2019 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया. आरएसएस से भगत सिंह कोश्यारी की काफी नजदीकी होने के चलते मोदी सरकार ने उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी है.

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