क्या छत्तीसगढ़ में भी होगी मध्यप्रदेश जैसी स्थिति

मध्यप्रदेश में उठे बवाल के बाद छत्तीसगढ़ के ‘महाराज’ ने आगे आकर साफ किया है कि वो पार्टी के साथ घात नहीं करेंगे !

मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच उठे बवंडर के बाद से राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकार पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में भाजपा के पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने तो यहां तक कह डाला है कि छत्तीसगढ़ के महाराज के पीछे भी करीब 40 विधायक हैं। वहीं मूणत के इस बयान के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच दरार को लेकर राजनीतिक गलीयारें गर्मा गए हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ में सरगुजा के महाराज केंद्रीय मंत्री टी.एस सिंहदेव की ओर से साफ कर दिया गया है कि सरगुजा के महाराज ग्वालियर के ‘महाराज’ की तरह दलबदल करने वालों में से नहीं है। उन्होंने कहा, “जिन्हें लगता है कि छत्तीसगढ़ की सत्ता में भी मध्यप्रदेश जैसा घात हो सकता है तो वे एक बात समझ लें कि यहां ऐसा होना मुमकिन नहीं”।

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याद हो कि 2018 में छत्तीसगढ़ की रमन सरकार का तक्ता पलट होने के बाद नाम टी.एस. सिंहदेव का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा माना जा रहा था। जिसकी वजह छत्तीसगढ़ चुनाव में रणनीति बनाने से लेकर चुनावी घोषणापत्र बनाने तक अहम जिम्मेदारी उन्हें ही सौंपा दी गई थी। चुनाव विश्लेषकों की माने तो राज्य में चुनाव के दौरान घर-घर जाकर असल मुद्दों को तलाशने और उन्हें चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करना ये सभी सिंहदेव की रणनीति का ही कमाल था। जिसकी बदौलत ही कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की। लेकिन सीएम पर भूपेश बघेल को मिलने के बाद इस फैसले पर टी.एस.सिंहदेव के समर्थकों ने जमकर नाराजगी भी जताई थी।

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हालांकि इस वक्त टी.एस. सिंहदेव ने सामने आते हुए कहा, ”लोग कयास लगा सकते हैं. लेकिन मैं कभी भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन नहीं करुंगा. यहां तक कि सौ जन्म भी मुझे मिलें तब भी मैं बीजेपी की विचारधारा नहीं अपनाऊंगा. एक व्यक्ति अगर इसलिए अपनी पार्टी छोड़ता है कि वह अपनी पार्टी में मुख्यमंत्री नहीं बन पाया तो मुझे लगता है कि उसे कभी मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए.”

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