तेलंगाना सरकार के लिए कोरोना नहीं रखता मायने, जानिए वजह

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार को एक बार फिर विचार करना चाहिए, क्योंकि देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं।

जहां देशभर में एक तरफ कोरोना का कहर जारी है, वहीं दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून पर भी बहस हो रही है। वहीं तेलंगाना विधानसभा ने सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हाल ही में लोगों ने सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन किए। जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का कहना है कि नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार को एक बार फिर विचार करना चाहिए, क्योंकि देश में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं। इस वजह से भारी संख्या में लोग देश से बाहर हो सकते हैं। तेलंगाना विधानसभा में सीएए के खिलाफ जो प्रस्ताव पारित हुआ है

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उसमें तेलंगाना सरकार से राज्य के लोगों को नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिक पंजी जैसे कार्यक्रमों से सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की गयी है। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पहले ही कई राज्य प्रस्ताव पास कर चुके हैं। जिसमें मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब शामिल हैं। वहीं केंद्र सरकार यह पहले ही साफ कर चुकी है कि कोई भी राज्य इस कानून को लागू करने से मना नहीं कर सकता है। बीते गुरुवार को संसद में सीएए, एनपीआर को लेकर जबदस्त बहस देखने को मिली थी। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। इसी के साथ अमित शाह ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि एनपीआर के लिए कोई दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं है।

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