मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार को कोई खतरा नहीं है जब फ्लोर टेस्ट होगा तो हम अपनी बहुमत को साबित करेंगे लेकिन कैसे इसका किसी के पास जवाब नहीं है।

नई दिल्ली: कमलनाथ भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम जिसे सत्ता के गलियारे का सूरमा कहा जाता है। आज वो कमलनाथ अपने मध्यप्रदेश में अनाथ होते दिख रहे हैं। देश के गोलघर में कई दशकों से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के नाथ आज जब सियासी संकट के दौर से गुजर रहे हैं, और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने होली के दिन रंग में भंग डाला है तो उसके मायने आखिर क्या हैं। सक्रीय राजनीति में रहते हुए कुशल भारतीय राजनीति के पुरोधा माने जाने वाले कमलनाथ आखिर कैसे इंदिरा गांधी से लेकर सोनिया गांधी के साथ पंजे से पंजा मिला के चलते रहे ये आपको जनना चाहिए।

कानपुर के कमलनाथ का जन्म 18 नवंबर 1946 को हुआ था। कमलनाथ की शादी अलका नाथ से हुई और उनके दो बेटे हैं।  लगातार कांग्रेस के टिकट से 8 बार से ज्यादा सांसद रह चुके हैं। कमलनाथ यूपीए शासनकाल में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री और केंद्रीय शहरी विकास मंत्री रहे चुके हैं। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से संसद पहुंचने वाले कांग्रस खेमे के सबसे विश्वसनीय सूत्रधार रहे हैं। कमलनाथ की शिक्षा-दिक्षा कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से हुई और वाणिज्य स्नातक में उन्होंने भी काम किया। साल 2007 के दरमियान कमलनाथ बतौर वाणिज्य मंत्री जब थे तो उनके उपर बासमती चावल को लेकर एक्सपोर्ट और इंपोर्ट के संदर्भ में बड़े आरोप लगे थे। तब विपक्ष में बैठी  भारतीय जनता पार्टी ने जमकर विरोध किया था। कमलनाथ को आर्थिक मसले पर अच्छा काम करने और विदेशी निवेशकों से अच्छे तालमेल को लेकर उन्हें सम्मानित भी किया गया था।

कमलनाथ सरकार पर लटकी तलवार, ज्योदिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस से इस्तीफा

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपना तीसरा बेटा मानती थीं। शायद इसीलिए कमलनाथ कांग्रेस में रहते हुए कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। नेहरु-गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों में कमलनाथ अव्वल दर्जे के नेता माने जाते रहे हैं। साल 1979 में मोरारजी देसाई की सरकार से टक्कर लेने के चलते इंदिरा गांधी ने कमलनाथ को ‘तीसरा बेटा’ कहा था। ऐसे में तमाम इन बातों के बीच आज सच्चाई ये है कि जब कमलनाथ 13 दिसम्बर 2018 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनको जरा सा भी इस बात का एहसास नहीं था कि उनको आज ये दिन भी देखना पड़ेगा। आज की तारीख में कमलनाथ के सामने सिर्फ मध्यप्रदेश की सत्ता बचाना ही नहीं बल्कि उनके राजनीतिक कद और उनके अनुभव भी दांव पे लगे हुए है।

आज कमलनाथ भारतीय राजनीति के उस हाशिये पर है जहां उनको या तो कुछ चमत्कार करना होगा या फिर ज्योतिरादित्य के साथ-साथ मध्यप्रदेश की क्षेत्रिय राजनीती और केंद्रीय बीजेपी नेतृत्व के सियासी बिसात पर झुकना पड़ेगा।  होली के दिन मध्यप्रदेश में जिस तरह से सियासी रंगों से होली खेली गई उसका अंत अभी नहीं हुआ है। मंगलवार को कमनाथ अपने अस्सी से ज्यादा विधायकों के साथ करीब दो घंटे बैठक किए। बैठक में तमाम विंदुओं पर मंथन हुआ और बात समाने ये निकल कर आई कि मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार को कोई खतरा नहीं है। जब फ्लोर टेस्ट होगा तो हम अपनी बहुमत को साबित करेंगे लेकिन कैसे इसका किसी के पास जवाब नहीं है। कुलमिलाकर मध्यप्रदेश में पिक्चर अभी बाकी है।

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