MP में सियासी उठा पटक के बाद कमलनाथ ने अपने त्यागपत्र में लिखी ये बातें

मध्य प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टंडन को कमलनाथ ने अपने सीएम पद का इस्तीफा सौंपा। अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रदेश की सियासी घटनाक्रम का उल्लेख किया है।

करीब दो सप्ताह से मध्य प्रदेश में चल रहे सियासी ड्रामे का आज पटापेक्ष हो गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद विधानसभा में बहुमत परीक्षण किए बगैर कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस्तीफे का ऐलान किया। उन्होंने राजभवन जाकर प्रदेश के राज्यपाल लाल जी टंडन को अपना इस्तीफा सौंपा। अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रदेश में चल रहे दो सप्ताह के सियासी घटनाक्रम का उल्लेख किया और इसे प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय बताया।

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कमलनाथ ने राज्यपाल लालजी टंडन को दिए अपने त्यागपत्र में लिखा, “मैंने अपने 40 साल के सार्वजनिक जीवन में हमेशा से शुचिता की राजनीति की है और प्रजातांत्रिक मूल्यों को सदैव तरजीह दिया है। मध्य प्रदेश में पिछले दो हफ्ते में जो कुछ भी हुआ, वह प्रजातांत्रिक मूल्यों के अवमूल्यन का एक नया अध्याय है।” उन्होंने आगे लिखा, “मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। साथ ही नए बनने वाले मुख्यमंत्री को मेरी शुभकामनाएं। मध्य प्रदेश के विकास में उन्हें मेरा सहयोग सदैव रहेगा।”

आपको बता दें कि बीते दिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की शाम पांच बजे तक मध्य प्रदेश विधानसभा में कमलनाथ सरकार को बहुमत साबित करने को कहा था। SC के आदेशानुसा, बहुमत साबित करने के मद्देनजर आज विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन इससे पहले ही कमलनाथ ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौप दिया। कमलनाथ के इस्तीफे के बाद बीजेपी का राज्य में सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है।

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ऐसे पैदा हुआ संकट

गौरतलब है कि 10 मार्च, को दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के तुरंत बाद कांग्रेस के 22 विधायकों ने भी कांग्रेस को अपना इस्तीफा सौपा। हालांकि, विधानसभा स्पीकर ने पहले 6 विधायकों का ही इस्तीफा स्वीकार किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बाकी 16 बागी विधायकों का भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया। ये सभी बागी विधायक ज्योतिरादित्य  सिंधिया के इस्तीफे समय बेंगलुरु चले गए थे और अभी भी वे सभी बेगलुरु में ही मौजूद हैं। सभी 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार 114 से 92 सीटों पर आ गई जिसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। बता दें कि दो विधायकों की मौत के बाद 2 सीटें खाली थी। वहीं, 206 विधायकों के सदन में बहुमत के लिए 104 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

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