दिल्ली विधानसभा चुनावों और दिल्ली दंगों के बाद फिर से चर्चा में आया Hate Speech का मामला

संविधान की आड़ में कुछ लोग इस आजादी का गलत फायदा उठाते है जिसके चलते अभिव्यक्ति की आजादी हेट स्पीच में बदल जाती है।

भारतीय संविधान में अनुच्छेद 19 (1) (ए) के अंर्तगत हर भारतीय नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार दिया गया है। जिसके जरिए भारत में हर नागरिक बिना डरे अपनी बात कहीं भी और कभी भी कह सकता है। लेकिन संविधान की आड़ में कुछ लोग इस आजादी का गलत फायदा उठाते हैं जिसके चलते अभिव्यक्ति की आजादी हेट स्पीच में बदल जाती है। हमारे नेता अक्सर अपनी बदजूबानी के चलते हमेशा चर्चा में आते रहते हैं। उस समय तो हर तरफ उस नेता या इंसान की बुराई होती है। लेकिन मामला शांत होने के बाद सब इसे भूल जाते है। अब एक बार फिर से हेट स्पीच चर्चा में है और उसके चर्चा में आने कि वजह है दिल्ली विधानसभा चुनाव और दिल्ली दंगों के दौरान नेताओं द्वारा की गई टिप्पणीयां।

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दिल्ली में ‘बिरयानी’ और ‘बुर्के’ से शुरु हुई ये बदजुबानी ‘गद्दार’ और ‘गोली मारो’ तक के दौर में पहुंच गई। आलम ये था कि गोली मारने और आग लगाने से शुरु हुआ ये खेल खून की प्यास बुझा कर ही रुका। बावजूद इसके इस मामले पर अबतक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा हेट स्पीच के मामले में FIR दर्ज करवाने के लिए दंगा पीड़ितों को होईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आज हम इस रिपोर्ट के जरिए ये जानने की कोशिश करेंगे की आखिर हेट स्पीच होती क्या है और इसके लिए हमारे कानून में इसके लिए क्या प्रावधान दिए गए हैं।यूरोपीय देशों की तरह भारत के क़ानून में भी हेट स्पीच की कोई परिभाषा नहीं दी गई है। ना ही हेट स्पीच के लिए अलग से कोई क़ानून है।

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हमारे संविधान में अभिव्यक्ति की आजादी का तो जिक्र है। लेकिन हेट स्पीच के बारे में कहीं भी कुछ भी लिखा नहीं गया है। जिसके चलते देश में अलग-अलग क़ानूनों के सहारे हेट स्पीच जैसे मामलों से निपटा जाता है। अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में यदि कोई व्यक्ति कुछ ऐसा बोलता है जिससे राज्य की सुरक्षा विदेशी राज्य के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध अदालत की अवमानना मानहानि भारत की संप्रभुता और अखंडता पर कोई आंच आती है तो उसे अभिव्यक्ति की आजादी में शामिल नहीं किया जाता है। जस्टिस बीएस चौहान की अगुवाई में भारतीय लॉ कमीशन ने मार्च 2017 में हेट स्पीच पर अपनी एक रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। कमीशन ने अपनी 267 वीं रिपोर्ट में कहा था कि भारतीय कानून में खासतौर से हेट स्पीच के लिए अलग कानून बनाने की जरुरत है।

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