सात महीने बाद रिहा हुए फारूक की पहली तस्वीर आई सामने, मीडिया से कहा- आज कुछ कहने को शब्द नहीं हैं

शुक्रवार शाम करीब सात महीने तक नजरबंद रखे जाने के बाद राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला को रिहा कर दिया गया। श्रीनगर के सांसद फारुक अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर सरकार ने अनुच्छेद 370 के खात्में के बाद से ही श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित उनके आवास पर नजरबंद रखा था। वहीं रिहा होने के बाद फारूक अब्दुल्ला की एक तस्वीर सामने आई है। सामने आई तस्वीर में अब्दुल्ला अपने परिवार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो जल्द ही दिल्ली जाकर संसद की कार्रवाई में भाग लेंगे। मीडिया से रूबरू होते हुए कहा, “वह आज आजाद हैं और फिलहाल कुछ भी कहने को उनके पास शब्द नहीं हैं। फारूक ने कहा कि उनकी आजादी तब तक अधूरी है, जब तक कि हिरासत में लिए गए सभी लोग रिहा ना हो जाएं”।

फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ लगा PSA हटा, होगी रिहाई

केंद्र सरकार के गृहराज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी के अनुसार, “जम्मू-कश्मीर में फिलहाल 400 से अधिक लोग हिरासत में हैं। इनमें से कई लोगों को स्थितियों की समीक्षा के बाद रिहा किया जाएगा”। फारूक ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात को दोहराया की मैं उन सभी का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे रिहा होने पर शुभकामना दी। लेकिन उनकी ये आजादी उस वक्त तक अधूरी है, जब तक कि हिरासत में लिए गए सभी लोग छूट ना जाएं।

प्रमुख सचिव ने जारी किए आदेश

जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रमुख सचिव शालीन काबरा ने इससे पहले शुक्रवार को फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगाए जाने के आदेश को वापस ले लिया था। फारूक अब्दुल्ला पर सरकार की ओर से 15 सितंबर को पीएसए लगाया गया था और इसके बाद इसे 13 दिसंबर को तीन महीने के लिए फिर आगे  बढ़ा दिया था। 13 मार्च को इसकी मियाद खत्म हो गई। जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया।

संसद की कार्रवाई में हिस्सा लेंगे फारूक

बता दें, फारूक को आदेश जारी होने के कुछ वक्त बाद ही हिरासत से रिहा कर दिया गया। इसके बाद फारूक परिवार के साथ अपने घर की छत पर दिखाई दिए। फारुक ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा, “आज मेरे पास शब्द नहीं हैं। आज मैं आजाद हुआ हूं। मैं दिल्ली जाकर संसद की कार्रवाई में हिस्सा ले सकूंगा और वहीं पर अपनी बात रखूंगा”।

महबूबा और उमर अब भी हिरासत में

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के कद्दावर राजनेताओं में से एक फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता नईम अख्तर, पूर्व आईएएस शाह फैसल समेत तमाम बड़े चेहरों को अब भी ऐहतियातन के तौर पर हिरासत में रखा गया है। हालांकि जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से अब तक इन नेताओं की रिहाई को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।

दो साल तक हो सकती है हिरासत

पीएसए के तहत दो प्रावधान हैं-‘लोक व्यवस्था’ और ‘राज्य की सुरक्षा को खतरा’। पहले प्रावधान के अनुसार किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के छह महीने तक और दूसरे प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रख सकते हैं। केवल जम्मू कश्मीर में पीएसए लागू है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) है।

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