मायावती के गढ़ से हुंकार भरेंगे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर

भीम आर्मी चीफ ने कहा कि दलित विरोधी गतिविधियों का जवाब देने के लिए पुराने मतभेदों को भुलाना जरूरी है।

संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के मामले में हिंसक प्रदर्शन को लेकर दिल्ली की तिहाड़ जेल से हाल ही में रिहा हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने एक बार फिर से बसपा सुप्रीमों मायावती की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। बसपा सुप्रीमो मायावती को खुला पत्र लिखते हुए चंद्रशेखर ने कहा भाजपा को मात देने के लिए बसपा और भीम आर्मी का साथ आना जरूरी है। बसपा से अपने मतभेद को भुलाकर आगे बढ़ने की बात करते हुए भीम आर्मी चीफ ने कहा कि दलित विरोधी गतिविधियों का जवाब देने के लिए पुराने मतभेदों को भुलाना जरूरी है।

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मीडिया रिपोर्ट की माने तो, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ने अपने पत्र में लिखा है कि देश की समस्याओं का समाधान केवल बहुजन समाज ही कर सकता है। उन्होंने बसपा सुप्रीमो से निवेदन करते हुए आगे लिखा, “हमें पुराने सभी मतभेदों को अलग रखते हुए एक साथ बैठकर चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि विचार-विमर्श से ही कोर्इ नया रास्ता निकल सकता है”। चंद्रेशखर की ओर से बसपा सुप्रीमो को कहा गया है, “आप कांशीराम की टीम की कोर सदस्य हैं। इसलिए आपका अनुभव हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मुझे पूरी उम्मीद है कि आप इस चर्चा में जरूर शामिल होंगी”।

चंद्रशेखर ने कहा कि बहुजन समाज से देश की काफी उम्मीदें जुड़ी हैं, लेकिन राजनीतिक कारणों की वजह से बहुजन समाज की राजनीति लुप्त होने की कगार में आ गई है। भाजपा की मजबूती के बारे में बोलते हुए चंद्रशेखर ने कहा, “2014 से 2019 के दौरान हुए सभी चुनावों में भाजपा ही मजबूत हुई है। यहां तक कि बहुजन समाज के गढ़ में भाजपा की वापसी हो गई है। यह समय बहुजन समाज की राजनीति का कठिन वक्त है। भाजपा के सत्ता में रहते बहुजन समाज पर अत्याचार के साथ उनके अधिकार छीने गए हैं। आरक्षण पर भी हमला किया जा रहा है”।

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बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर द्वारा बसपा के साथ मैदान में उतरने की बात कही थी, लेकिन उस समय बसपा प्रमुख मायावती ने उनकी इस अपील को सिरे से नकार दिया था। ध्यान हो कि इस चुनाव में सपा से गठबंधन के बावजूद भी बसपा को मात्र 10 सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी। वहीं उससे पहले विधानसभा चुनाव में भी केवल 18 सीटों पर बसपा ने अपना जादू चलाया था।

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