जानें, आखिर क्यों आप चीजें रखकर भूल जाते हैं

कुछ ही देर पहले आप कोई चीज़ कहीं रखते हैं और फिर भूल जाते हैं कि आपने वो चीज़ कहां रखी थी। उस टाइम बड़ा अजीब लगता है कि हमारे दिमाग को क्या हो गया है जो अभी कुछ देर पहले रखी चीज़ ही हमें याद नहीं आ रही है। क्या हमारी याददाश्त कमज़ोर होने लगी है? यही सवाल आपके दिमाग में भी आता होगा।

अक्सर लोग सुबह ठंडे पानी से नहाते हैं। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो आपके भूलने की बीमारी का शिकार होने की आशंका न के बराबर है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का हालिया अध्ययन यही बयां करता है। शोधकर्ताओं ने लंदन के पार्लियामेंट हिल स्विमिंग स्टेडियम में तैराकी का लुत्फ उठाने वाले वयस्कों के खून की जांच की। इस दौरान उन में ‘कोल्ड-शॉक प्रोटीन’के नाम से मशहूर ‘आरबीएम-3’ अधिक मात्रा में मिला। बता दें कि यह यौगिक आमतौर पर शीतस्वाप अवधि (हाइबरनेशन) में रह रहे स्तनपायी जीवों में पैदा होता है। तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित करने वाले पुल (सिनैप्स) के पुनर्विकास के लिए इसे बेहद अहम माना जाता है।

मुख्य शोधकर्ता के मुताबिक डिमेंशिया रोगियों में ‘सिनैप्स’पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इससे तंत्रिका तंत्र के बीच सूचनाओं का प्रवाह नहीं हो पाता। नतीजतन मरीज को याददाश्त, तर्क शक्ति और एकाग्रता में कमी की शिकायत से जूझना पड़ता है। सूचनाओं का विश्लेषण करने और एकसाथ कई काम निपटाने की उसकी क्षमता में भी गिरावट आती है।

आरबीएम-3 है अहम चीज़आरबीएम-3’ तंत्रिका तंत्र में ‘सिनैप्स’के पुनर्विकास में अहम भूमिका निभाता है। ‘सिनैप्स’तंत्रिका तंत्र की दो कोशिकाओं के बीच न्यूरोट्रांसमिटर का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित करने वाले पुल को कहते हैं। न्यूरोट्रांसमिटर यादें संजोने, सूचनाओं का विश्लेषण करने, विभिन्न कार्य निपटाने और अहम यौगिकों के उत्पादन के लिए जरूरी दिशा-निर्देशों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करते हैं।

मानव शरीर में ‘आरबीएम-3’ प्रोटीन के उत्पादन की पुष्टि होने से अल्जाइमर्स और डिमेंशिया के इलाज में कारगर दवाओं के निर्माण की उम्मीद जगी है। शोध दल ने कहा, इससे बिना ठंडे पानी से नहाए ही ‘आरबीएम-3’ के उत्पादन की विधि ईजाद की जा सकेगी, ताकि भूलने की बीमारी से बचाव में मदद मिले।

ध्यान दें शोधकर्ताओं ने नहाने के लिए 34 डिग्री सेल्सियस से कम ठंडे पानी का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी। उनकी मानें तो ऐसा करने वाले लोगों की नसों में खून का बहाव रुक सकता है। अहम अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति न होने से उनके खराब होने और व्यक्ति की जान जाने का खतरा रहता है।

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