कोरोना के बीच चर्चा में आया मौलाना साद आखिर है कौन?

निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज यानी इस्लामिक धार्मिक आयोजन केंद्र में हजारों की संख्या में लोगों को इकट्ठा करने मामले में अभियुक्त मौलाना साद कौन है ।

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज यानी इस्लामिक धार्मिक आयोजन केंद्र में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा मामला सामने आने के बाद राजधानी समेत पूरे देश में हड़कंप की स्तिथि मची हुई है। देश में जारी लॉक डाउन के बीच

मरकज में काफी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने मामले को लेकर साद समेत 6 अन्य के खिलाफ महामारी कानून 1897 के तहत केस भी दर्ज कर लिया है। तो चलिए जानते हैं कौन है ये मौलाना साद जो कोरोना के कहर के बीच अचानक चर्चा में आ गया है।

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कौन हैं मौलाना साद… 

1965 में दिल्ली में जन्मे मौलाना साद, मौलाना मोहम्मद फारुख के बेटे हैं। मौलाना साद का पूरा नाम मौलाना मुहम्मद साद कांधलावी है जो कांधला जिला शामली निवासी हैं और पूर्व मुजफ्फरनगर के।

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मौलाना साद ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मदरसा काशिफुल उलूम, हजरत निजामुद्दीन में हुई जिसके बाद उन्होंने सहारनपुर से आलमियत की डिग्री प्राप्त की। मौलाना साद ने 1995 में तब्लीगी जमात के सर्वेसर्वा मौलाना इनामुल हसन के इंतकाल के बाद खुद को संगठन का अमीर यानी सर्वेसर्वा घोषित किया। जिसके बाद मरकज की बागड़ोर अपने हाथों में ली।

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