दुधमुंही बच्ची को गोद में लेकर कहां चल पड़े मजदूर... कर्मचारियों के लिए ये कैसा फरमान

अजमेर के ओमप्रकाश कुशवाहा गोद में 7 महीने की दुधमुंही बच्ची को लिए सड़क पर पैदल चलते नजर आए।

मजबूरी इंसान को कुछ भी करने को मजबूर कर देती है। देश में लॉक डाउन जारी है ऐसे में वो मजदूर जिनकी आजीविका दिहाड़ी पर निर्भर थी वो क्या करें। अब न तो उनके पास काम है न ही पेट पालने के लिए कोई और रास्ता इतना ही नहीं दूर गांव से शहरों में आकर बसे इन मजदूरों के पास कमरे का किराया देने के लिए भी पैसे नहीं हैं। अब जब सारे दरवाजे बंद हो गए तो फिर नज़र आया वापस घर का दरवाज़ा लेकिन जाएं भी तो कैसे ट्रांसपोर्ट भी बंद। कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से जूझ रहे मजदूर और उनका परिवार इस लॉक डाउन के पसरे सन्नाटे के बीच सड़कों पर चलते नज़र आते हैं।

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पैदल ही तय करना पड़ रहा घर का रास्ता

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर ऐसे ही परिवारों का जत्था देखने को मिल रहा है। इन्हीं सबके बीच अजमेर के ओमप्रकाश कुशवाहा गोद में 7 महीने की दुधमुंही बच्ची को लिए सड़क पर पैदल चलते नजर आए। कोई वाहन न मिलने के कारण अब वो एक सप्ताह तक पैदल चलकर घर पहुंचने की ठान चुके हैं। ऐसे न जाने कितने परिवार है जो लॉक डाउन की मार झेल रहे हैं। इनके पास न तो रोजगार है और न ही घर पहुंचने का साधन ।

कर्मचारियों को घर जाने का फरमान

लॉक डाउन के कारण सभी प्रतिष्ठान मालिकों ने अपने कर्मचारियों को घर वापस जाने का फरमान सुना दिया है लेकिन इन कर्मचारियों का अब क्या होगा ये किसी ने नहीं सोचा। ऐसा ही फरमान गुरूग्राम में नौकरी करने वाले राजकुमार को भी मिला। राजकुमार का घर हजारों किमी. दूर बिहार के छपरा में स्थित है और जेब में मौजूद है सिर्फ 1 हजार रूपए। घर वापसी के फरमान के बीच सैलरी का भी कुछ पता नहीं। अब आखिर बिना रोजगार के कैसे परिवार का पेट पाला जाए। इसी उधेड़बुन में राजकुमार अपनी मां, पत्नी और 3 महीने की बच्ची को लेकर पैदल ही निकल पड़े गांव की ओर। इस पैदल मार्च में न जाने ऐसे और कितने परिवार मिले जो घर वापसी कर रहे थे। पैदल घर वापसी कर रहे इस जज़्बे को सलाम जिसने यूपी तक का सफर तय कर लिया।

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पलायन का सिलसिला सरकार के लिए चिंता का विषय

दिल्ली-एनसीआर से गांव की ओर पलायन करने वाले ऐसे तमाम परिवार सरकार के लिए भी चिंता का विषय है। काम-धंधा बंद होने के कारण ये लोग गांव वापसी के लिए मजबूर हैं लेकिन लॉक डाउन के दौरान सड़कों पर पसरे सन्नाटे के बीच पलायन करने वाले इन परिवारों के कारण लॉक डाउन का मकसद भी खतरे में पड़ गया है क्योंकि लोगों को सुरक्षित रखने के मकसद से घर पर रहने के लिए लॉक डाउन का पालन किया जा रहा है तो वहीं मजबूरी के कारण ये परिवार कोरोना के संक्रमण के खतरे से अनजान घर वापसी के लिए प्रयासरत हैं।

सरकार द्वारा मजदूरों के लिए व्यवस्था

सड़कों पर परिवार को लेकर पैदल घर वापसी कर रहे इन मजदूरों की समस्या को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने संज्ञान में लिया। सीएम योगी ने इन मजदूरों के लिए विशेष व्यवस्था करने का आदेश दिया। साथ ही पुलिस को इन मजदूरों के खाने-पीने और सुरक्षा का जिम्मा दिया। तो वहीं मनोहर लाल खट्टर ने भी गुरुग्राम और फरीदाबाद से आ रहे मजदूरों को उचित व्यवस्थाएं मुहैया कराने का आदेश दिया है।

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