सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फिर लगाई फटकार, इसबार कही ये बात

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तुषार मेहता ने कहा कि 95 लोग शुरुआती तौर पर पहचाने गए. उनकी तस्वीरें होर्डिंग पर लगाई गईं. इनमें से 57 पर आरोप के सबूत भी हैं।

नई दिल्ली: नागरकिता संशोधन कानून के दौरान राजधानी लखनऊ में हिंसा और हिंसा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर लखनऊ के चौराहों पर उपद्रवियों के पोस्टर का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के पाले में है। जहां से कोर्ट लगातार यूपी सरकार को फटकार लगा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि सरकार की यह कार्रवाई कानूनन सही नहीं है। आपको  बता दें कि  सुप्रीम कोर्ट से पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि लखनऊ के दिवारों पर से तत्काल पोस्टरों को हटाया जाए।

जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती दी।  जिसमें गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, हम इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने पर विचार कर रहे हैं। न्यायाधीश ललित ने कहा कि इस मामले को अब चीफ जस्टिस देखेंगे।

वहीं सरकार की तरफ से बोलते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पक्ष रखा जिसमें तुषार मेहता ने कहा कि 95 लोग शुरुआती तौर पर पहचाने गए. उनकी तस्वीरें होर्डिंग पर लगाई गईं. इनमें से 57 पर आरोप के सबूत भी हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमने आरोपियों को नोटिस जारी करने के बाद कोई जवाब ना मिलने पर अंतिम फैसला किया। जिसके बाद उनकी तस्वीरों को दिवारों पर लगाया गया।

जाहिर है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली से यूपी तक सियासी घमासान मचा हुआ है। इन सब के बीच आरोप और प्रत्यारोप का भी दौर जारी है।

हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने योगी सरकार पर बडा हमला बोलते हुए कहा था कि यूपी की योगी सरकार अपने आपको डॉ भीमराव अंबेडर के कानून से उपर समझने लगी है।

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