फिर तय हुई दोषियों की फांसी की तारीख

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फिर तय हुई दोषियों की फांसी की तारीख

दोषियों की फांसी में हो रही देरी एक तरह से कानून व्यवस्था को भी सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है।

16 दिसंबर 2012 ये वो रात थी जब दिल्ली की सड़कों पर निर्भया के साथ हैवानियत हुई। इस दिल दहला देने वाली घटना को 7 साल से ज्यादा का वक्त बीत गया है। लेकिन अभी तक निर्भया को न्याय न्याय नहीं मिला। निर्भया की मां और देश दोषियों को मिल रहे बार-बार समय पर समय से आहत हैं, लेकिन बावजूद इसके वो कुछ कर नहीं सकते। दोषियों की फांसी में हो रही देरी एक तरह से कानून व्यवस्था को भी सवालों के कटघरे में खड़ा कर रही है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या निर्भया के दोषियों को उनके कर्मों की सजा मिलेगी?। क्या दोषियों के जुल्म और बर्बरता के आगे अपनी सांसों की माला तोड़ने वाली निर्भया को इंसाफ मिलेगा?। ये सवाल इसलिए भी क्योंकि पहले 22 जनवरी फिर 1 फरवरी और फिर 3 मार्च ये वो तारीखें हैं जो निर्भया के दोषियों की मौत के लिए तय की गई थी। लेकिन शायद दोषियों के वकील के हथकंडे कानून व्यवस्था के आगे मजबूत हैं तभी तो एक बार नहीं बल्कि तीन बार निर्भया के दोषियों को खुली हवा में सांस लेने के लिए समय मिल गया।

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वहीं अब एक बार फिर इस दोषियों की मौत का दिन मुकरर्र कर दिया गया है। दिल्ली की एक अदालत द्वारा जारी डेथ वारंट में 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी का प्रावधान किया गया है। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के आगे दोषियों के वकील एपी सिंह खफा दिखे। उन्होंने कोर्ट के फैसले को गलत जताते हुए कहा, “ये लोग आतंकवादी नहीं हैं, जो इन्हें मारना चाहते हैं..आप कितनी बार इन्हें फांसी देंगे”। एपी सिंह ने कहा, “ये चौथा डेथ वारंट जारी हुआ है. 2013 के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, रिव्यू पेटिशन के बाद दोषियों को फांसी का ऐलान किया गया”। एपी सिंह ने कहा कि तीन बार दबाव में फांसी दी जा चुकी है और अब चौथी बार फिर फांसी दे रहे हैं। इतना ही नहीं कोर्ट के फैसले से बौखलाए वकील एपी सिंह ने कहा, “संविधान के रहते हुए कितनी बार फांसी दोगे, कितनी बार मारोगे इन लोगों को…ये आतंकवादी नहीं हैं, पढ़े-लिखे हैं और जेल में सुधर रहे हैं”।

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आप आग से खेल रहे हैं

कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े करने के साथ ही दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा, “अभी भी अदालत में अक्षय की मर्सी पेटिशन है, वहां राष्ट्रपति भवन की रिसिविंग भी है. लेकिन हमारी मर्सी पेटिशन के आर्टिकल 72 को खत्म करना चाहते हैं. एपी सिंह ने आरोप लगाया कि कोर्ट हमें कहती है कि आप आग से खेल रहे हैं और परिणाम गलत होंगे”। खुद को डराने का आरोप लगाते हुए एपी सिंह ने कहा, “कानूनी अधिकार प्रयोग करना अब गलत हो गया है”।

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