इस कारण UP के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में अगले साल से M.Phil कोर्स किया जा रहा खत्म

नई शिक्षा नीति में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें से एक है M.Phil को समाप्त करना। M.Phil को समाप्त करने को लेकर यूपी के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का कहना है कि M.Phil का महत्व उतना अधिक नहीं है जितना पीएचडी का। M.Phil करने के बाद भी छात्र पीएचडी के लिए ही नामांकन कराता है।

उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से M.Phil पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त करने का फैसला किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 में यह इस पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। ‌बता दें कि यह जानकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम एक वर्ष की अवधि का है, जबकि पीएचडी पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवधि का है। M.Phil के लिए एपीआई स्कोर 5 से 7 प्वाइंट का है, जबकि पीएचडी का एपीआई स्कोर 25-30 प्वाइंट का है। नई शिक्षा नीति के तहत की गई संस्तुति के संबंध में शासन ने M.Phil पाठ्यक्रम को समाप्त करने के बारे में प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों से अभिमत मांगा था।

लखनऊ विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी एवं महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की संस्तुतियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 से M.Phil पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त करने का फैसला किया। वहीं कुछ प्रोफेसर M.Phil को शोध से पहले का एक बेहतरीन प्रशिक्षण मानते हैं। वहीं M.Phil कर चुके या M.Phil करने वाले छात्र इसकी वैधता को लेकर चिंतित हैं। उन्हें यह चिंता है कि आगे उनकी डिग्री को कितनी मान्यता मिलेगी। इसके आधार पर उनको नौकरी में सुविधा होगी कि नहीं।

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