तो क्या एमपी के बाद राजस्थान की है बारी, देखिए क्या है तैयारी…

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पायलट तमाम मौकों पर गहलोत सरकार को घेरते रहे हैं फिर वो चाहे कोटा में बच्चों की मौत से जुड़ा मामला हो या फिर नागौर में हुए दलितों के साथ अत्याचार को लेकर।

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश में जिस तरह से सियासी उठापटक देखने को मिल रहा है, उन सब के बीच कांग्रेस पार्टी को अब ये डर सताने लगा है कि बीजेपी मध्यप्रदेश के ही तर्ज पर अब राजस्थान में भी कहीं सेंधमारी न करने लगे। लिहाजा इस बात के डर से राजस्थान की गहलोत सरकार अब एक-एक विधायक पर कड़ी नजर बनाई हुई है।

राजनीतिक सूत्र कहते हैं कि अशोक गहलोत अपने तमाम विधायकों के साथ-साथ गहलोत उन निर्दलीय विधायको के भी संपर्क में है, जिन्होंने राजस्थान में कांग्रेस को समर्थन दिया है।

बीजेपी की तोड़फोड़ राजनीति को देखते हुए सीएम गहलोत के साथ-साथ कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे भी सतर्क हो गए हैं। 199 विधानसभा सीट वाले राजस्थान में जब 2018 में चुनाव हुए तो कांग्रेस पार्टी के खेमें में 107 विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

ऐसे में 26 मार्च को राज्यसभा के लिए चुनाव होना है। राजस्थान में भी तीन सीटों के लिए राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे। मौजूदा दौर में राजस्थान से बीजेपी के नौ सदस्य राज्यसभा में हैं। राजस्थान में कुल 10 राज्यसभा की सीटें हैं।

स्वाभाविक तौर पर इधर जब ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो रहे थे, तो उधर कांग्रेस के तमाम रणनीतिकार राजस्थान को लेकर असहज हुए होंगे।  क्योंकि यहां भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

पायलट तमाम मौकों पर गहलोत सरकार को घेरते रहे है फिर वो चाहे कोटा में बच्चों की मौत से जुड़ा मामला हो या फिर नागौर में हुए दलितों के साथ अत्याचार को लेकर। यहां तक की गहलोत सरकार की मनमर्जियां को लेकर सचिन पायलट लगातार कई बार दिल्ली पहुंच कर अपनी शिकायत दर्ज कराते रहे हैं। बावजूद इसके सीएम गहलोत के व्यवहार और कार्यशैली पर कोई फर्क नहीं पड़ा है।

लिहाजा अब उम्मीद की जा सकती है कि मध्यप्रदेश की स्थिति को देखते हुए पार्टी सचिन पायलट के विचारों और उनके निर्णयों का सम्मान करते हुए बातों को मानने लगे।

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