बरसाने की गलियों में उड़ रहे रंग गुलाल, खेली जा रही लठमार होली

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ऐसे में अगर आप भी होली के मोके पर बरसाने की होली देखना चाहते हैं और बृज के गलियों में रंगो से सराबोर होना चाहते हैं तो आप भी बरसाना जा सकते हैं।   

नई दिल्ली: वैसे तो होली पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन कृष्णनगरी मथुरा में जो होली खेली जाती है उसका तो कोई जवाब ही नहीं है। वृज में रंगो का त्योहार अपने आपमें सबसे अद्दभूत होता है। यमुना के किनारे जब गोपियां अपने श्याम के साथ रंगो का त्योहार होली खेलती है तो वो नज़ारा अपने आप में सबसे खास होता है।

बरसाने की होली देखने के लिए लोग देश विदेश से आते है। वैसे तो प्रमुख तौर पर होली एक दिन मनाई जाती है लेकिन बरसाने की होली निराली है। यहां होली चालिस दिन पहले से ही शुरु हो जाती है। होली के मुख्यदिन से पहले यहां लड्डू होली, फूलों की होली, लठमार होली उसके बाद रंगो की होली मनाई जाती है । शायद इसीलिए बरसाने की होली दुनिया भर में अपनी एक अलग छाप छोड़ती है।

राधाश्याम को चाहने वाले करोड़ों भक्त यहां करीब एक महीने पहले ही डेरा डाल देते है। अपने परिवार के साथ समय निकाल कर यहां की होली देखने आते हैं। इस दौरान सरकार की भी पूरी कोशिश रहती है कि लोगों को परेशानी न हो इसके लिए बेहद खास इंतजाम किया दाता है। सुरक्षा के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं पर सरकरा ध्यान देती है। मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन पर्वत  के साथ-साथ राधारानी का घर बरसाना सब एक दूसरे से सटे हुए है। जहां आप कम समय के अंतराल में  इत तमाम दिव्य स्थानों पर जाकर आस्थारुपी आनंद ले सकते है।  देश के किसी भी हिस्से से आप सीधे तौर पर यहां पहुंच सकते है। राजधानी दिल्ली से बरसाने की दूरी लगभग तीन घंटे की है। वहीं मथुरा रेलवे स्टेशन से बरसाने की दूरी तकरीबन एक घंटे की है।

ऐसे में अगर आप भी होली के मोके पर बरसाने की होली देखना चाहते है और वृज के गलियों में रंगो से सराबोर होना चाहते हैं तो आप भी बरसाना जा सकते हैं।  

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