फ्री राशन पाने के लिए लॉकडाउन की उड़ी धज्जियां

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प्रशासन के फूले हाथ-पांव जब मुफ्त राशन पाने वालों की देखी भीड़

कोरोना महामारी से जारी जंग के बीच अफवाहों ने प्रशासन की नाक में दम कर दिया है। कभी लॉकडाउन को लेकर अफवाह फैलाई जाती है तो कभी विश्व स्वास्थ्य संगठने के नाम पर भी गलत जानकारी सर्कुलेट कर दी जाती है। कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन है लेकिन अफवाहों के कारण बार-बार लॉकडाउन के उल्लंघन की खबरें जारी हैं। एक गलत जानकारी कितने लोगों की जान से खल सकती है शायद लोगों को इसका अंदाजा भी नहीं है इसीलिए कोरोना से संबंधित कोई भी जानकारी, उपाय आदि को बिना उसकी प्रमाणिकता जाने वायरल कर दिया जाता है। अफवाहों से लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाने का ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सामने आया है। जहां मुफ्त राशन वितरित किए जाने की अफवाह फैला दी गई। कुछ ही देर में ये खबर पूरे जिले में आग की तरह फैल गई और बस फिर घरों से थैला लेकर लोग दौड़ पड़े सड़क की ओर।

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अफवाह फैलाने का जिम्मेदार कौन ?

वैसे तो अभी तक अफवाह फैलाने का मुख्य जिम्मेदार सोशल मीडिया को माना जाता है लेकिन यहां मामला थोड़ा अलग है। दरअसल लखीमपुर खीरी के मीनार मस्जिद के पास बनी अंजुमन कमेटी की तरफ से मुफ्त में राशन दिए जाने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। घोषणा के बाद सुबह 6 बजे से ही लोगों की लंबी लाइन लगना शुरू हो गया। इतनी लंबी लाइन देखकर प्रशासन भी सकते में आ गया। आनन-फानन में अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाकर लोगों को खदेड़ना शुरू किया गया और बमुश्किल हालात को नियंत्रित किया गया।

अफवाह के चलते कमेटी को नोटिस जारी

कमेटी की एक घोषणा ने जिस तरह अफवाह का रूप लिया और लोगों की भीड़ लगने के कारण जिस तरह लॉकडाउन का उल्लंघन हुआ उसे देखते हुए जब पूछताछ की गई तो कमेटी ने सफाई पेश करते हुए कहा कि कमेटी ने गरीब विधवाओं को मुफ्त राशन देने की घोषणा की थी। लेकिन लोगों ने सभी लोगों के लिए मुफ्त राशन वितरित किए जाने की अफवाह फैला दी। वहीं दूर-दूर से सुबह से लाइन में लगे लोगों को खाली झोला लेकर निराश वापस लौटना पड़ा। इस मामले की जांच-पड़ताल के लिए एसडीएम अरुण कुमार सिंह ने कमेटी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

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लॉकडाउन में राशन को लेकर बढ़ी लोगों की चिंता

बेशक सरकार हेल्पलाइन नंबर जारी कर लोगों को हर सुविधा मुहैया कराने और इस दौरान जमाखोरी करने वालों सख्त कार्रवाई का आदेश दिया हो लेकिन लॉकडाउन के कारण राशन को लेकर लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल लॉकडाउन के दौरान पुलिस के पहरे से बचते हुए लोग आस-पास की दुकानों से राशन, सब्जी आदि लेने को मजबूर हैं। लेकिन इसी मजबूरी का दुकानदार फायदा उठाते नज़र आ रहे हैं। लॉकडाउन के कारण दुकानदार हर सामान के दाम को बढ़ाकर बेच रहे हैं और लोगों की मजबूरी उन्हें दुकानदारों के मनमाफिक दाम पर सामान लेना भी पड़ रहा है। सरकार द्वारा हेल्पलाइन नंबर तो जारी किया गया है जहां जमाखोर, भ्रष्ट दुकानदारों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है लेकिन फिर लॉकडाउन के दौरान इन दुकानदारों से संबंध भी कोई खराब नहीं करना चाहता क्योंकि मजबूरी इन्हें फिर दुकानदार के सामने लाकर खड़ा कर देगी। जानकारी के मुताबिक कुछ दुकानदार तो बेफिक्र हैं जिन्हें शिकायत का भी डर नहीं है। हर सामान के दाम बढ़ाकर बताते हैं और यदि आप उनसे पूछताछ करते हैं तो वो न तो आपको सामान देंगे और न ही आपको दुकान पर आने देंगे। इसके अलावा कुछ लोग जो राशन स्टॉक में खरीद सकते हैं उनके स्टॉक खरीदने के कारण भी दुकानों में राशन की कमी हो जाती है जिससे जरूरतमंद स्टॉक तो दूर अपनी आवश्यकतानुसार भी सामान नहीं खरीद पाते। यही कारण है कि जब मुफ्त में राशन आदि देने की कोई अफवाह भी फैलाई जाती है तो लोग इसे बड़ी राहत समझते हुए अपने घरों से दौड़ पड़ते हैं। यदि उचित मात्रा में घर के आसपास ही उचित दाम पर राशन, सब्जी आदि उपलब्ध हो जाए तो शायद मजबूर लोगों को लॉकडाउन भूलकर भीड़ लगाने की आवश्यकता ही न पड़े।

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