जानें, तब्लीगी जमात से जुड़ा ये विवाद

राजधानी में चर्चा का विषय बने मरकज का मामला पहले भी काफी सुर्खियों में बना रहा है। इस मरकज के तार कई विवादों से जुड़े हैं।

देश में अभी दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज का मामला काफी गरमाया हुआ है। इस मामले में मुख्य अभियुक्त बनाए गए मौलाना साद का ही नहीं बल्कि इस तब्लीगी जमात के तार भी कई विवादों से जुड़े हैं।

दो दल में बांट दिया गया था जमात

साल 2017 के करीब तब्लीगी जमात को लेकर एक बड़ा विवाद हुआ था। इस विवाद में जमात दोनों में धड़ों में विभजित हो गया था। जहां एक तरफ मौलाना साद ने ने खुद को पुरानी तब्लीगी जमात के प्रमुख के रूप में घोषित कर दिया था तो वहीं दूसरी ओर 10 लोगों के साथ सूरा कमेटी बन गई है जो कि दिल्ली के तुर्कमान गेट पर मस्जिद फैज-ए-इलाही से अपनी अलग तब्लीगी जमात को चलाती है।

तबलीगी जमात के लोगों ने बचाव दलों के साथ किया अभद्र…

10 लोगों के साथ सूरा कमेटी जिस मस्जिद फैज-ए-इलाही नाम की जमात को चलाती है उसमें मौलाना इब्राहीम, मौलाना अहमद लाड और मौलाना जुहैर जैसे इस्लामिक स्कॉलर जुड़े हैं। एक मार्च को ही तब्लीगी जमात के आयोजन को कोरोना के संक्रमण को लेकर मस्जिद फैज-ए-इलाही ने रद्द कर दिया था।

आपको बता दें दारुल उलूम देवबंद ने 2017 की फरवरी महीने में दारुल उलूम देवबंद ने तब्लीगी जमात से जुड़े मुसलमानों को फतवा जारी कर साद पर कुरान और सुन्नत की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया। मौलाना साद के भोपाल सम्मेलन में दिए गए बयान के बाद देवबंद का यह फतवा सामने आया था। साद के भोपाल सम्मेलन में कहा था,  “(निजामुद्दीन) मरकज मक्का और मदीना के बाद दुनिया का सबसे पवित्र स्थल है”। मौलान साद के इस बयान को दारुल उलूम देवबंद ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बताया।

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