कोरोना से जीत रहा है, भारत…..

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कोरोना के कहर तो दुनियाभर में है लेकिन इसी बीच कोरोना से जीत के शुभ संकेत भी सामने आ रहे हैं।

देश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 4 हजीर का आकड़ा पार कर गई है। लेकिन एक शुभ संकेत भी है कि देश में कोरोना के कहर को देखते ही उचित समय पर उचित निर्णय लेकर भारत सरकार ने  देश में लॉकडाउन लगा दिया था। जिसके कारण आज भारत की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले काफी बेहतर हैं। देश में मरने वालों की संख्या अन्य देशों के मुकाबले काफी कम हैं। जिसके कारण कोरोना पर भारत की जीत दिखाई दे रही है। डाटा विश्लेषकों ने पाया है कि कोरोना वायरस अब देश के कुछ खास हिस्सों तक सीमित हो कर रह गया है। जिसके कारण अब जल्दी ही कोरोना के खिलाफ जारी जंग में जीत हासिल की जा सकती है।

जमात के मामले न होते तो रुक चुका होता संक्रमण -योगी…

बता दें कि अनुमान के अनुसार जल्दी ही कोरोना वायरस की रफ्तार थमने वाली है। वैसे भी अन्य देशों अमेरिका, स्पेन, इटली, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ईरान, यूके से भारत का हाल काफी बेहतर हैं। तो वहीं भारत जनसंख्या के मामले में काफी बड़ा है, अगर कोरोना जैसी बीमीरी भारत में फैलती है तो ये बहुत भयावह स्थिति होती। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की त्वरित रणनीति और उन्हें मिलने वाले अपार जनसमर्थन ने कोरोना के हृदय पर चोट की है।

डेटा विश्लेषकों ने दिए अच्छे संकेत

विशेषज्ञों का माना है कि कोरोना के प्रसार के आंकड़ों का विश्लेषण करने से अच्छे संकेत दिखाई दे रहे हैं। साथ ही ये अंदाजा भी लगाया जा रहा है कि भारत में कोरोना वायरस का अंतिम चरण 9 मई से शुरु हो सकता है। ऐसे में ये संभव है कि इसके पहले कोरोना के पॉजिटिव मामलों की संख्या थम जाए। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले अगले दो से तीन दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या में होने वाली बढ़त कम हो सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और गंभीरता से लें।

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कोरोना वायरस को रोकने के लिए सरकार ने जनता से 21 दिन तक घर में रहने की अपील की थी। जिसे कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके। लेकिन इसी बीच तबलीगी जमात के कट्टरपंथियों की मूर्खता की वजह से कोरोना के मामलों में तेजी दिखाई देने लगी। अन्यथा अभी तक मरीजों की संख्या स्थिर होने लगती।

 अगर दिनों के हिसाब से देखी जाए  तो भारत में –

  • 23 मार्च को कोरोना के मरीजों की संख्या 499 थी
  • 24 मार्च को 536 हुई
  • 25 मार्च को 657 हुए
  • 26 मार्च को 727 हुए
  • 31 मार्च को 1397 हुए
  • 1 अप्रैल को 1998 हुए
  • 2 अप्रैल को 2543 हुए
  • 3 अप्रैल को 3059 हुए
  • 5 अप्रैल को 3588 रहे।

इस आंकड़े की तुलना यूरोप और अमेरिका से की जाए तो यह कुछ भी नहीं है।

कोरोना मरीजों की संख्या में ये इजाफा भी तबलीगी जमातियों के कट्टरपंथियों की मूर्खता की वजह से हुआ। बता दें कि सिर्फ दिल्ली के आंकड़ों में जमातियों ने करीब करीब 10 गुना की बढ़ोतरी कर दी। जिसके कारण कोरोना से संक्रमितों की संख्या दुनियाभर में दोगुनी हो गई है। तो दूसरी ओर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के प्रमुख रमन आर गंगाखेडकर ने बताया है कि नेशनल और रीजनल लेवल पर लॉकडाउन के निर्धारण में हॉटस्पॉट की पहचान एक महत्वपूर्ण

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