सीएम योगी आदित्यनाथ के तीन साल कितने बेमिसाल?

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इसके अलावा योगी सरकार ने कांवड़ियों पर फूलवर्षा कल्पवासियों की बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ तमाम उन रुटों पर बिकने वाले मांशाहारी पर बैन लगाया था, जो कावड़ियों के चलने के दौरान सड़क किनारे बिकते थे। हालांकि ये तमाम वो बिंदु हैं जो ये बताते हैं कि कैसे बाकी पार्टियों से अलग यूपी की योगी सरकार है।

नोएड़ा: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में प्रदेश का विकास पिछले तीन सालों में कितना हुआ। राज्य सरकार ने किन-किन क्षेत्रों में अपना योगदान दिया और मानवकल्याण के लिए कितना काम किया ये तमाम वो सवाल हैं जो राज्य की जनता जानना चाहती है।

2017 में जब अजय सिंह विष्ट उर्फ योगी आदित्यनाथ राजधानी लखनऊ के रमादेवी मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उस वक्त के तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मौजूद थे तब सीएम योगी ने यूपी को रामराज्य के पथ पर अग्रसित करने की बात कही थी। ऐसे में आज जब तीन साल हो गए हैं तो सीएम योगी अपने वादों पर कितने खरे उतरे हैं ये जानने की जरुरत है।

तो शुरुआत कहा से करें? वहां से जहां गंगा, यमुना और सरस्वती की तीन धाराएं बहती है? जहां सरकार के सामने पहले ही साल में चुनौती के तौर पर विशाल कुंभ मेला था, याफिर वहां से जहां पुलिस को अपराधियों पर एनकाउंटर करने के लिए खूली छूट दे दी गई थी, भगवा में रंगती यूपी और यूपी में एंटी-रोमियो स्क्वॉयड के अलावा तमाम वो बाते हैं जो योगी आदित्यनाथ के तीन साल बीतने के बाद ये पूछ रही हैं कि बताइये योगी जी कि आप यूपी में सपा-बसपा से कितने बेहतर हैं,तो जवाब जब आप टटोलने की कोशिश करेंगे तो आईने में आपकों ये मुद्दे दिखाई पड़ेंगे।

शुरुआत 2020 से करते हैं और 2017 में खत्म करते हैं, जहां से भगवाधारी योगी आदित्यनाथ ने बतौर मुख्यमंत्री की शुरुआत की थी।

उपद्रवियों पर नकेल कसने के लिए अध्यादेश

योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीएए से निपटने और भविष्य में किसी भी तरह की हिंसा से निपटने के लिए कार्रवाई के तौर पर उपद्रवियों से क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए पिछले 13 मार्च को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश रिकवरी पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी अध्यादेश पारित किया है। इस अध्यादेश के आने से ट्रिब्यूनल का गठन होगा और न्यायाधीश ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे। ट्रिब्यूनल के माध्यम से ये तय किय़ा जाएगा कि आखिर दंगे में सार्वजनिक और निजी संपंति को कितना नुकसान हुआ है।उसी के आधार पर क्षतिपूर्ति की जाएगी। जिसमें मुख्यरुप से क्लेम के तौर पर कमिश्नर की भूमिका अहम होगी।

निजी विश्वविद्यालयों पर कसी नकेल

साल 2019 में योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रविरोधी गतिविधि और न ही कैंपस में किसी भी प्रकार की देश विरोधी नारेबाजी हो इसके लिए यूपी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज ऑर्डिनेंस 2019 लेकर आई। जिसके तहत सरकार किसी भी गतिविधि में यूनिवर्सिटी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

एनकाउंटर करने की दी छूट

उत्तर प्रदेश में बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने न्यायसंगत तरीके से पुलिस को एनकाउंटर करने की छूट दी। लिहाजा जिसके प्रदेश में कई एनकाउंटर देखने को मिले। सीएम योगी के एनकाउंटर वाले नीति पर कई सवाल भी खड़े हुए, लेकिन उनका एजेंडा साफ था अपराधी या तो सुधरेंगे या फिर जाएंगे।

छेड़छाड़ से बचने के लिए एंटी-रोमियो स्क्वॉयड का गठन

उत्तर प्रदेश के तमाम स्कूल कॉलेजों के बाहर जिस तरह से अक्सर छेड़छाड़ करने का मामला सामने देखने को मिलता था उससे निपटने के लिए सरकार सत्ता में जैसे आई उसके कुछ दिनों बाद एंटी रोमियों स्क्वॉयड का गठन किया। हालांकि सरकार की ये पहल ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पाई।

बदले गए शहरों के नाम

योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेशे के तमाम शहरों के नाम बदले गए। योगी आदित्यनाथ जब पहली बार बतौर मुख्यमंत्री अय़ोध्या पहुंचे तो उन्होंने फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या रख दिया इलाहाबाद का प्रय़ागराज। और मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर का पंडित दिन दयाल उपाध्याय किया।

इसके अलावा योगी सरकार ने कांवड़ियों पर फूलवर्षा कल्पवासियों की बेहतर व्यवस्था के साथ-साथ तमाम उन रुटों पर बिकने वाले मांशाहारी पर बैन लगाया था, जो कावड़ियों के चलने के दौरान सड़क किनारे बिकते थे। हालांकि ये तमाम वो बिंदु हैं जो ये बताते हैं कि कैसे बाकी पार्टियों से अलग यूपी की योगी सरकार है।

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