इस नवरात्रि करें मां को खुश, पाए संतान का सुख

माता रानी के नौ दिन चल रहे हैं सच्चें दिल से मांगी सारी मनोकामना पूरी होनी के दिन। मान्यता है  कि माता रानी की दया से घर में सुख- समृधि के साथ-साथ धन और खुशियां का आगमन होता हैं।

माता रानी के नवरात्र के दिन चल रहे हैं। मान्यता है कि सचे दिल से माता रानी की अराधना करने से भक्तों के सारे दुख दर्द दूर होते हैं और माता रानी की कृपा उस घर पर बनी रहती हैं। इनकी दया से घर में सुख- समृधि के साथ धन और खुशियां भी बनी रहती हैं। तो वहीं कहा जाता हैं कि इन दिनों स्कंदमाता और षष्ठी देवी की पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती हैं। बता दें कि भगवान स्कंद बालरूप में माता की गोद में विराजमान हैं। वहीं माता ने अपनी चार भुजाओं में से दाहिनी उपरी भुजा ने भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। माना जाता है इनके आशीर्वाद से संतान का सुख मिलने के साथ ही दुखों से मुक्ति भी मिलती है।

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माँ षष्ठी देवी को भी माँ दुर्गा का ही स्वरूप माना जाता हैं माँ षष्ठी देवी जिसे शिशुओं की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता हैं। माता रानी ऐसी दम्पत्ति पर अपनी कृपा बरसा के उनके घर खुशिया भर देती हैम। जिन्हें संतान नहीं होती हैं। तो वहीं नवरात्र के दिनों में षष्ठी माता की आराधना करने से उस दम्पत्ति को सुख की प्राप्ति होती हैं। इसके अलावा संतान को दीर्घायु भी यही माता प्रदान करती हैं।

तो आइए आपको बताते हैं इसके लिए कैसे करें पूजा

मनोकामना पूरी करने और माता को खुश करने के लिए मां की विधिवत ढंग से पूजा की जाती हैं। इसको करने के लिए कुश या कंबल के पवित्र आसान पर बैठे। इसके बाद लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर कुमकुम से ऊं लिखकर स्कंदमाता की प्रतिमा को स्थापित करें और गंगा जल व गौमूत्र से उसे शुद्ध करें इसके बाद मनोकामना की पूर्ति के लिए चौकी पर मनोकामना गुटिका को रखें और हाथ में पीले फूल लेकर सचे दिल से एकग्रता से माता का ध्यान करें। ध्यान करने के बाद हाथ के फूल को वहीं चौकी पर छोड़ दें। मनोकामना सहिम विधिवत तरीके से पूजा करें। माता रानी को भोग के रूप में पीले रंग के फल, मिठाई अर्पित करें। ये सब करने के साथ माता रानी के मंत्र का जाप करें ।

- इस नवरात्रि करें मां को खुश, पाए संतान का सुख

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मां स्कंदमाता का मंत्र

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

या देवी सर्वभूतेषुमां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

ये बात तो हुई स्कंदमाता के बारें में अब बात कर लेते है माँ षष्ठी देवी के बारें में-

माँ षष्ठी देवी पूजा विधि

जिस दंपत्ति को संतान का सुख नहीं मिल पाता हैं। अगर वो दंपत्ति माता षष्ठी देवी की अराधना करें तो मां की कृपा से उन्हें संतान की प्राप्ति हो सकती हैं। उसके लिए भक्तों को नवरात्र काल में दोनों संध्याओं (सुबह+शाम) में माता षष्ठी के स्तोत्र का पाठ करना चाहिए । नवरात्र के दिनों में पहले दिन संतान प्राप्ति की कामना से शालिग्राम शिला, कलश, वटवृक्ष का मूल अथवा दीवार पर लाल चंदन से षष्ठी देवी की आकृति बनाकर उनका पूजन 9 दिनों तक श्रद्धा विश्वास से करना चाहिए । इसके अलावा नीचे दिये हुए मंत्र का उच्चारण करें।

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षष्ठांशां प्रकृते: शुद्धां सुप्रतिष्ठाण्च सुव्रताम् ।

सुपुत्रदां च शुभदां दयारूपां जगत्प्रसूम् ।।

श्वेतचम्पकवर्णाभां रत्नभूषणभूषिताम् ।

पवित्ररुपां परमां देवसेनां परां भजे ।।

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