गरीबों की थाली पर लॉक डाउन की मार

लॉक डाउन ने छीना गरीबों का निवाला भूख की तड़प ने इन्हें घास खाने को मजबूर कर दिया है

कोरोना से देश को बचाने के लिए सरकार ने लॉक डाउन तो कर दिया लेकिन उनका क्या जिनकी दो वक्त की रोटी भी लॉक डाउन के कारण छिन गई ? बेशक सरकार लॉक डाउन के दौरान लोगों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है लेकिन बावजूद इसके कुछ गांव की ऐसी मार्मिक स्थिति सामने आई है जिसे देखकर लॉक डाउन की लाचारी साफ झलकती है।लॉक डाउन के दौरान सबसे बड़ा संकट गरीबों के सामने आ गया है भुखमरी का। न तो जीविका अर्जन का स्रोत है और न ही परिवार का पेट पालने के सामर्थ्य। वाराणसी के बड़ागांव से ऐसा ही मार्मिक तस्वीर सामने आई है। यहां के कोइरीपुर गांव में भूख से व्याकुल बच्चे अंकरी घास खाकर पेट की क्षुधा को शांत करने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं यये मासूम खेत में बिने हुए आलू भी खा रहे हैं क्योंकि इन मासूमों को तो लॉक डाउन का मतलब भी नहीं पता लेकिन बस मजबूर कर दिया है भूख की तड़प ने इन्हें घास खाने को।

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जानकारी के अनुसार मुसहर समुदाय के इन बच्चों को भूख मिटाने के लिए घास खाते पाया गया। जब इस बात की जानकारी लोगों तक पहुंची तो सचिन और सुनील ना के दो युवक इन मासूम बच्चों के पास पहुंचे और आटा, चावल, साबुन, तेल आदि सामान उन्हें वितरित किया। इसके साथ ही आगे भी उनकी मदद करने का आश्वासन दिया । बड़ागांव थानाध्यक्ष और ग्राम प्रधान ने भी मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए परिवार को 10-10 किलो चावल औरर 2-2- किलो दाल सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराई। वहीं इस तरह के मामले पर ग्राम प्रधान ने कहा है कि इस तरह के करीब 40 परिवारों को वो राशन की कमी नहीं होने देंगे। गौरतलब है कि इस परिवार के लोग ईंट-भट्टे पर काम करके आजीविका चलाते हैं।

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लॉक डाउन के ककारण काम मिलना बंदद हो गया और इसका सीधा असर पड़ा इनके निवाले पर । जब हालात बदतर हो गए और कुछ भी खाने को नहीं मिला तो अंकरी घास खाने को मजबूर हो गए। अंकरी घास वो घास होती है जिसे पशुओ को चारे के रूप में खिलाया जाता है। ये सिर्फ एक गांव का मामला नहीं है बल्कि न जाने कितने ऐसे परिवार हैं जो लॉक डाउन के कारण भूखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। जब देश महामारी से जूझ रहा है तो ऐसे में सरकार जहां हर संभव प्रयास देशहित में कर रही है तो हमें भी आगे आना चाहिए ऐसे जरूरतमंदों की मदद के लिए जिससे कोरोना का खौफ किसी गरीब को भुखमरी की नींद न सुला दे।

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