अष्टमी और नवमी तिथि पर, जाने इन वर्ष की कन्या के पूजन से होती है माता की विशेष कृपा

आज नवरात्र की अष्टमी तिथि है और कल नवमी तिथि हैं। हर व्यक्ति अपने अनुसार इन दो तारिखों में कन्या पूजन और कन्या भोज करता हैं। जिसे भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती हैं।

माता रानी के चैत्र नवरात्र का समापन होने जा रहा हैं। इसके लिए लोग माता रानी के रूप में कन्याओं को पूजते हैं। कन्याएं पृथ्वी पर प्रकृति स्वरूप मां शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं और श्रृष्टिसृजन श्रंखला का अंकुर होती है। बता दें कि धरती पर कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता हैं। जैसे बिना सांस के व्यक्ति नहीं रह सकता उसी तरह बिना कन्याओं के इस श्रृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। नवरात्रों में कन्या पूजन का विशेष महत्व हैं। बिना कन्या पूजन के नवरात्र पूरे नहीं माने जाते। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि में कन्या पूजना का क्या धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

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पौराणिक एवं धार्मिक मान्यता

मार्कन्डेय पुराण के अनुसार श्रृष्टि सृजन में शक्ति रूपी नौदुर्गा, व्यस्थापक रूपी 9 ग्रह, चारों पुरुषार्थ दिलाने वाली 9 प्रकार की भक्ति ही संसार संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। जिस तरह किसी भी भगवान की पूजा करके व्यक्ति उस भगवान से सम्बंधित प्रभु की कृपा प्राप्त कर लेते हैं। इस तरह मनुष्य प्रकृति रूपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात् मां भगवती का आर्शीवाद पा सकते हैं। तो वहीं शास्त्रानुसार दो साल की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को अ+उ+म त्रिदेव-त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा के समान माना जाता है। साथ ही धर्म ग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं को सीधा माता का स्वरूप माना जाता है।

कैसे करें कन्याओं का पूजन कैसे करें माता रानी के खुश-

  • सबसे पहले कन्या का पूजन

कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता हैं। तो वहीं इसको लेकर दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि “कुमारीं पूजयित्या तू ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम्” इसका मतलब दुर्गापूजन करने से पहले कुवांरी कन्या का सच्चे दिल से पूजन करें कन्या के पूजन के बाद ही मां दुर्गा का पूजन करें। तो आइए जानते है दुर्गा सप्तशती के अनुसार कौन-सी कन्या को कहा जगह दी गई है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार एक वर्ष की कन्या पूजा से ऐश्वर्य, दो वर्ष की कन्या पूजा से भोग, तीन वर्ष की कन्या पूजा से चारों पुरुषार्थ, चार वर्ष की कन्या पूजा से मान-सम्मान, पांच वर्ष की कन्या पूजा से बुद्धि-विद्या ज्ञान, छ: वर्ष की कन्या पूजा से कार्यसिद्धि, सात वर्ष की कन्या पूजा से परमपद, आठ वर्ष की कन्या पूजा से अष्टलक्ष्मी और नौ वर्ष की कन्या पूजा से सभी एश्वर्य की भक्त को प्राप्ति होती हैं। जिसे माता रानी की कृपा उस भक्त और उसके परिवार पर बनी रहती है।

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  • मंत्र के बारें में बात करें तो-

पुराण के अनुसार माता रानी के ध्यान के लिए मंत्र इस प्रकार हैं-

मंत्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्।।

जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरुपिणि। पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोस्तु ते।।

।। कुमार्य्यै नम:, त्रिमूर्त्यै नम:, कल्याण्यै नमं:, रोहिण्यै नम:, कालिकायै नम:, चण्डिकायै नम:, शाम्भव्यै नम:, दुगायै नम:, सुभद्रायै नम:।।

  • क्या है पूजा विधि-

साक्षांत देवी स्वरूप कन्याओं का पूजन करने समय सबसे पहले उनके चरणों को धोएं। इसके पश्चात पुनः पंचोपचार विधि से पूजन करें और तत्पश्च्यात सुमधुर भोज कराएं और बाद में भोज के बाद कन्याओं को शक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें। इस तहर कन्या का पूजन करने से मां भगवती खुश होकर उस घर में अपनी कृपा बरसाती हैं। कहा जाता है कि जिस घर पर माता रानी की कृपा हो जाए उस घर में कभी कोई दुख परेशानी किसी तरह की कोई समस्या नहीं आती है।

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