भारत में कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी

सावधान! रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद आप हो सकते हैं कोरोना पॉजिटिव

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच अब सरकार की चिंता को बढ़ाने के लिए ‘फॉल्स नेगेटिव’ मरीजों के मामले सामने आने लगे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों की बड़ती संख्या के साथ ही अब फॉल्स नेगेटिव मामलों ने डॉक्टरों की मुश्किल भी बढ़ा दी है।

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क्या है फॉल्स नेगेटिव रिपोर्ट के मामले

कोरोना के संदिग्धों की पहचान करना ही बड़ी चुनौती था। इसी बीच एक और चुनौती बनकर फॉल्स रिपोर्ट के मामले सामने आए हैं। आखिर क्या है फॉल्स नेगेटिव रिपोर्ट ये भी आपको बताते चलें दरअसल अभी तक कोरोना संदिग्धों की पहचान कोरोना से संबंधित लक्षणों को पता लगाकर की जाती है लेकिन अब डॉक्टरों के लिए और भी बड़ी परेशानी बनकर फॉल्स नेगेटिव के मामले सामने आए हैं। फॉल्स नेगेटिव के मरीजों में कोरोना संक्रमण के कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं लेकिन जब कोरोना टेस्ट किया जाता है तब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है। ऐसे में लक्षणों के अभाव में न तो मरीज को उसके संक्रमित होने का पता चलता है औरर न ही उसके संपर्क में आने वाले लोगों को इसका पता चल पाता है। ये बेहद घातक हालात होते हैं जिसमें संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ने का डर रहता है।

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भारत में कहां मिले फॉल्स नेगेटिव मरीज ?

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के केरल से फॉल्स नेगेटिव मामले सामने आए हैं। जहां 2 मरीजों में कोरोना संक्रमण के कोई भी लक्षण नहीं थे लेकिन शक के आधार पर जब उनका टेस्ट करवाया गया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसी तरह कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कोरोना संदिग्धों को लक्षण न नज़र आने के काररण औरर रिपोर्ट नेगेटिव होने के चलते हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। जिसेक कुछ दिन बाद ही मरीज की मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि मरीज कोरोना पॉजिटिव था। इस तरह के मामले ही फॉल्स नेगेटिव मामलों में शामिल हैं जहां बिना लक्षणों के मरीज कोरोना पॉजिटिव होता है लेकिन ये जरूरी नहीं कि उसकी रिपोर्ट में वो कोरोना पॉजिटिव ही पाया जाए। ये देश ही नहीं पूरी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।

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फॉल्स नेगेटिव मामलों की भारत में दस्तक पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जताई चिंता

एक तरफ जहां भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटे डॉक्टरों के संक्रमित होने से स्वास्थ्य मंत्रालय चिंतित है तो वहीं दूसरी तरह फॉल्स नेगेटिव मामलों के भारत में दस्तक देने से स्वास्थ्य मंत्रालय की चिंता और भी अधिक बढ़ गई है क्योंकि ये वो हालात हैं जब बिना लक्षणों के ही कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव हो सकता है और अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित रहें, इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ‘दीक्षा’ नामक ट्रेनिंग मॉड्यूल तैयार किया है, जिसके माध्यम से सभी नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाएगा। कोरोना संदिग्धों की पहचान लक्षणों के आधार पर की जा सकती है लेकिन जब मरीज में लक्षण ही न हों तो आखिर कैसे पहचाना जाए? पूरी दुनिया में करीब 30 फीसदी फॉल्स नेगेटिव मरीजों के मामले सामने आ चुके हैं। चीन में 80 फीसदी कोरोना संक्रमित लोग वही थे जिन्हें खुद को बिल्कुल स्वस्थ महसूस कर पा रहे थे। शोधकर्ताओं की मानें तो फॉल्स नेगेटिव मरीजों की जबतक जांच कर संक्रमित होने की पुष्टि की जाती तब तक कई लोग संक्रमित हो चुके होते थे। ऐसे में भारत में फॉल्स नेगेटिव के मरीजों के मामले सामने आने से सरकार और डॉक्टरों की चिंता कई गुना बढ़ गई है आखिर किस तरह मरीजों की पहचान की जाए और कैसे इसे रोका जाए।

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