भारतीय जनता पार्टी का 40वां स्थापना दिवस

जानें BJP के नामकरण से चुनाव चिह्न तक की कहानी

6 अप्रैल 1980 यानि कि आज के ही दिन भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी। आज भारतीय जनता पार्टी का 40वां स्थापना दिवस है लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के कारण पार्टी की तरफ से कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया है। क्या आप जानते हैं भारतीय जनता पार्टी नाम किसने सुझाया और बीजेपी के कमल चिह्न के पीछे क्या कहानी है ?पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी आत्मकथा ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ में राजनीति के पथ पर बीजेपी की यात्रा का ज़िक्र किया है। आइए आपको भी रूबरू कराते हैं बीजेपी के नाम से लेकर कमल चिह्न के इतिहास से।

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किसने दिया भारतीय जनता पार्टी नाम ?

पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी आत्मकथा‘मेरा देश, मेरा जीवन’ में लिखा है कि पार्टी जनसंघ से बाहर निकलकर एक नई शुरूआत करना करना चाहती थी। इसके लिए पार्टी के सभी दिग्गजों ने नई पार्टी के नाम पर गहन चिंतन किया। पहले भारतीय जनसंघ नाम पर विचार किया गया लेकिन बाद में अटल बिहारी वाजपेयी ने भारतीय जनता पार्टी नाम का सुझाव दिया जिसपर सभी की सहमति मिली।

भारतीय जनता पार्टी में कैसे खिला कमल ?

बीजेपी के कमल चिह्न को देखकर अक्सर मन में सवाल उठता है कि आखिर कमल के फूल को पार्टी का सिंबल चुनने के पीछे क्या उद्देश्य रहा होगा। इस संबंध में लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा में दिया है कि जैसे-तैसे भारतीय जनता पार्टी का नाम तो तय हो गया लेकिन अब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी और अभी तक पार्टी का नाम भी चुनाव आयोग को पंजीकृत नहीं कराया गया और न ही पार्टी का सिंबल आवंटित हुआ। लालकृष्ण आडवाणी ने मुख्य चुनाव आयुक्त एस एल शकधर से मुलाकात की। शकधर ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद पार्टी को पंजीकृत करने में कठिनाई बताई। फिर भी उन्होंने चुनाव चिह्न चुनने को कहा। उपलब्ध चुनाव चिह्नों में कमल का फूल देखकर आडवाणी जी प्रसन्न हो गए क्योंकि दिल्ली में पार्टी के स्थापना अधिवेशन में झंडे के लिए कमल का फूल ही चुना गया था। आडवाणी जी की प्रसन्नता को देखकर शकधर ने कहा उनका अनुरोध स्वीकार्य है। लेकिन फिर आडवाणी जी ने देखा कि अन्य विकल्पों में गुलाब का फूल भी है और दोनों ही चिह्न एक समान प्रतीत हो रहे थे। इस पर आडवाणी जी ने शकधर से अनुरोध करते हुए गुलाब के फूल को चिह्न की सूची से हटाने को कहा क्योंकि दोनों फूलों के समान प्रतीत होने के कारण मतदाता असमंजस में पड़ सकते थे। आडवाणी जी की दूरदर्शिता को देखकर शकधर ने कहा उनका अनुरोध स्वीकार्य है।

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जबरदस्त संघर्ष ने लहराया परचम

सड़क से सदन तक का सफर भारतीय जनता पार्टी ने अपने अडिग इरादों और लगन के बल पर तय किया। भारतीय जनता पार्टी के संघर्ष ने ही बीजेपी को देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में स्थापित कर दिया है। भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने जो सपना देखा आज भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता के शिखर पर भगवा ध्वज लहराकर उस सपने को साकार कर दिया है। भारतीय जनसंघ को आरएसएस की शाखा के रूप में भी जाना जाता था। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दुनिया को हिंदू संस्कृति अवगत कराना था।

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