इस अध्यादेश के आने से ट्रिब्यूनल का गठन होगा और न्यायाधीश ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे। ट्रिब्यूनल के माध्यम से ये तय किय़ा जाएगा कि आखिर दंगे में सार्वजनिक और निजी संपंति को कितना नुकसान हुआ है।उसी के आधार पर क्षतिपूर्ति की जाएगी।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार उपद्रवियों को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है । नागरिकता संशोधन कानून को मोहरा बनाकर हिंसा करने वाले उप्रदवियों के चेहरे जब से दिवारों और होर्डिंस पर लगे हैं, तब से लेकर रोजाना कोई न कोई सियासी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ तो ठहरे ‘योगी’ वो कहा शांत बैठने वाले हैं। वे जब तक दंगाइयों से वसूली नहीं कर लेंगे उनको चैन की नींद नहीं आ सकती।

दरअसल, सीएए को लेकर जिस तरीके से हिंसा देखने को मिली थी, जिसमें भारी संख्या में राजधानी लखनऊ समेत यूपी के कई शहरों को आग के हवाले कर दिया गया था। करोड़ों की सार्वजिनक औऱ व्यक्तिगत संपत्तियों को नुकसान पंहुचाया गया था, उसको लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार ने तमाम उपद्रवियों की तस्वीरों को दिवारों पर बकायदा नाम पते के साथ चस्पा करवाया था।

जिसके बाद  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि किसी भी व्यक्ति का निजी पता और उसकी गोपनियता को सार्वजनिक तौर पर बताना संविधान के अनुच्छेद 21 का सरासर उल्लंघन है। लिहाजा ये तस्वीरें तुरंत हटाई जाएं।

जिसके बाद योगी सरकार इस मसले को लेकर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट पहुंची। जहां कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को सौप दिया।

इनसब के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के तहत कानून बनाकर दंगाइयों से वसूली करने के लिए अध्यादेश लाई, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 में कहा था कि अगर किसी प्रदर्शन या विरोध के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुक़सान होता है तो इसे रोकने के लिए कड़े नियम सरकारों को बनाने चाहिए।

जिसके तहत योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रापर्टी अध्यादेश लाई है जिसपर सियासी बयानबाजी के साथ-साथ जमकर राजनीति भी हो रही है।  

इस अध्यादेश के आने से ट्रिब्यूनल का गठन होगा और न्यायाधीश ऐसे मामलों की सुनवाई करेंगे। ट्रिब्यूनल के माध्यम से ये तय किय़ा जाएगा कि आखिर दंगे में सार्वजनिक और निजी संपंति को कितना नुकसान हुआ है।उसी के आधार पर क्षतिपूर्ति की जाएगी। जिसमें मुख्यरुप से क्लेम के तौर पर कमिश्नर की भूमिका अहम होगी।

कुलमिलाकर अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जब हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मसले पर एक है, तो योगी आदित्यनाथ सरकार इस मामले में क्या कुछ कर पाती है।

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