गंभीर बीमारी की चपेट में फंसते जा रहे हैं देश के युवा

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युवाओं के जीवन में अंधेरा घोल देता है ‘डिप्रेशन’

बड़े शहरों की चकाचौंध भरी लाइफ में हर तरफ मौजमस्ती का आलम है, लेकिन फिर भी युवा कम उम्र से ही डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं अक्सर यह सुनने और देखने को मिलता है कि युवा पीढ़ी डिप्रेश्न मे रहती है। जिसकी वजह से वे हर वक्त मानसिक तनाव और चिंता मे रहते हैं। आज 100 से में 40 प्रतिशत व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार है। देश की करीब 10 फीसदी आबादी इससे जूझ रही है। जिसमें बड़ी संख्या में युवा व टीन एजर्स ही शामिल हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अकेलापन, बेरोजगारी, मनमाफिक जॉब न मिलना और काम का अधिक बोझ युवाओं को डिप्रेशन की ओर धकेल रहा है।

अधिकतर युवा अकेलापन, टूटते व एकल परिवार, पारिवारिक अलगाव, शिक्षा, रोजगार आदि कारणों की वजह से डिप्रेशन से घिरते जा रहे हैं। शहरों की व्यस्त जिंदगी में परिवार वालों के लिए समय निकाल पाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में अकेलापन लोगों पर हावी हो जाता है । धीरे धीरे वह व्यक्ति बाहरी दुनिया से दूर-दूर रहने लगता है और अपने दिल की बात किसी से नही कह पाता। यह स्थिति व्यक्ति को डिप्रेशन के स्टेज पर पहुंचा देती है। जिसके बाद इस स्थिति में लोग शराब, अफीम या अन्य किसी नशे को अपना दोस्त बना लेते हैं। और एक ऐसी मानसिकता आ जाती है जिससे वे सामान्य भाषा में विक्षिप्त या पागलपन का शिकार हो जाती है।

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शहर में बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग कारणों से इस दिक्कत से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसके कोई खास लक्षण न होने से खुद पेशेंट भी इस बात का अंदाजा नहीं लगा पाता। अभिभावकों के नौकरीपेशा होने से वह बच्चों पर अक्सर ध्यान नहीं दे पाते। आज के दौर मे परिवार सीमित हो रहे है एक छोटे दायरे में सिमट रहे हैं । और उस पर फोन और इंटरनेट पर चिपके रहना जीवन शैली बन जाए तो फिर भीड़ में भी अकेलेपन का एहसास होना लाजमी है।

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यूं तो मनुष्य का उदास या निराश होना स्वाभाविक है, लेकिन जब ये एहसास काफी लंबे समय तक बना रहे तो समझ जाइए कि वो तनाव की स्थिति में है। यह एक ऐसा मानसिक विकार है, जिसमें व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता। उसे अपना जीवन नीरस, खाली-खाली और दुखों से भरा लगता है। प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग कारणों से तनाव हो सकता है। किसी बात या काम का अत्यधिक दवाब लेने से यह समस्या पैदा हो जाती है। डॉक्टरों के अनुसार तनाव अपने आप में बड़ा रोग है। कई बार तनावग्रस्त व्यक्ति आवेश में आकर सुसाइड जैसा कदम भी उठा लेता है। तनाव से अनिद्रा, हृदय रोग, माइग्रेन, भूख कम लगना, चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें हो जाती हैं।

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डिप्रेश्न पर कैसे नियंत्रण पाएं

ड़िप्रेश्न और अकेलेपन को दूर करने के लिए आप वर्किग शेड्यूल में भी परिवार के साथ फुर्सत के पल बिताएं। काम के साथ रिलेक्स भी करें। नियमित व्यायाम करें। अध्यात्म के लिए समय निकालें।परिवार के साथ हल्के विषयों पर चर्चा करें। सकारात्मक सोच रखें।अपने काम को वरीयता क्रम में बांटे और एक समय में बस एक ही काम करें। जब कभी भी स्ट्रेस महसूस करें एक गहरी सांस लें। अपना हर काम प्लानिंग से करें। कहीं बाहर जाकर छुट्टी मनाएं। यदि किसी बात को लेकर डिप्रेस्ड हैं और उसे किसी को बता नहीं सकते तो उसे डायरी में लिखें।

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