उत्तर प्रदेश में थमे एंबुलेंस के पहिए !

क्या गैरकानूनी है एंबुलेंस चालकों की हड़ताल ?

देश कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है। ऐसे में डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका किसी भगवान से कम नहीं है। लेकिन अगर इस संकट की घड़ी में भगवान भी मदद करने से पीछ हट जाएं तो क्या हो ? जी हां कुछ ऐसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश में पैदा हो गई है। कोरोना के संदिग्ध मरीज को अस्पताल ले जाने और टेस्टिंग से लेकर मरीज को भर्ती करने की पूरी प्रक्रिया में एंबुलेंस चालकों का बड़ा योगदान है। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के सामने बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है।

प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर एंबुलेंस चालकों की हड़ताल

कोरोना जैसी महामारी के संकट की घड़ी में एंबुलेंस चालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। वेतन और कोरोना से बचाव की सुरक्षा किट की मांग को लेकर एंबुलेंस चालकों ने नारेबाजी की और एंबुलेंस बुलाने के लिए आने वाली किसी भी कॉल को रिसीव नहीं किया।

क्या मानवता भूल स्वार्थी हो गए हैं एंबुलेंस चालक ?

जब देश पर स्वास्थ्य संकट आया है तब स्वास्थ्य कर्मी ही अगर हड़ताल पर चले जाएंगे तो शायद स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। एंबुलेंस चालकों की मांग को गलत नहीं ठहरा सकते लेकिन जब देश पर संकट आया है तब अपनी मांग पूरा करवाने के लिए इस संकट की घड़ी में मानवता धर्म से मुंह मोड़ लेना भी उचित नहीं है।

मेरठ में हुई 19 सैंपल्स की जांच, सभी निगेटिव

एंबुलेंस चालकों की हड़ताल का जिम्मेदार कौन ?

किसी व्यक्ति की जान बचाने में जितनी अहम भूमिका एक डडॉक्टर की है उतनी ही एंबुलेंस चालक की भी क्योंकि एंबुलेंस चालक ही समय से मरीज को अस्पताल पहुंचाने का काम करते हैं। लेकिन जब सरकार इनकी सुरक्षा की अनदेखी करेगी तो परिणाम भयावह ही होंगे। जहां बस्ती में एंबुलेंस चालक हड़ताल के ऐलान के बाद काफी समझाने के बावजूद काम पर वापस नहीं लौटे तो वहीं गोंडा और अयोध्या में भी एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से ऐलान मच गया। हालांकि गोंडा में सीएमओ के काफी समझाने के बाद सेवाएं बहाल कर दी गईं। अयोध्या के जिला संयोजक अनिल पांडेय ने चालकों की परेशानी के संबंध में बताया कि ससेवा प्रदाता कंपनी ने चालकों को 2 महीने से वेतन नहीं दिया है और जब एंबुलेंस चालक कोरोना के मरीजों को लगातार अस्पताल में भर्ती कराने का कार्य कर रहे हैं तो ऐसे में एंबुलेंस चालकों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। इसी तरहउत्तर प्रदेश में एंबुलेंस चालकों की हड़ताल का असर बाराबंकी, चंदौली और लखीमपुर खीरी में भी देखने को मिला।लगातार इनकी मांगों की अनदेखी होने के कारण 102, 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के आह्वान पर एंबुलेंस चालकों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया जिसके बाद पूरे उत्तर प्रदेश में हाहाकार मच गया। जिम्मेदार अधिकारियों पर तमाम सवाल खड़े होते हैं कि आखिर एंबुलेंस चालकों का शोषण करते हुए उन्होंने एंबुलेंस चालकों की अहमियत को क्यों गंभीरता से नहीं लिया ? जब देश में कोरोना महामारी का संकट गहराया है तब एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से स्थिति और भी अधिक बढ़ सकती है।

एंबुलेंस चालकों का दु:

वेतन और सुरक्षा किट की मांग के अलावा एंबुलेंस चालकों की एक और मांग सामने आई है। दरअसल सरकार ने आशा कार्यकत्रियों को 50 लाख के बीमा के दायरे में रखा है लेकिन एंबुलेंस चालकों को इस सुविधा से वंचित कर दिया।

एंबुलेंस चालकों की हड़ताल पर सरकार का आश्वासन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत तमाम जिलों में एंबुलेंस चालकों की हड़ताल के बाद हाहाकार मच गया। मास्क, ग्लव्स और सैनेटाइजर की मांग की सरकार को अनदेखी करना भारी पड़ गया। जब प्रदेश में एंबुलेंस के पहिए थमे तो सरकार के सामने एक और संकट आ गया कि कहीं इस हड़ताल के गंभीर परिणाम भुगतने न पड़ जाएं। हालांकि हड़ताल के ऐलान को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने आश्वासन दिया है कि उनकी सुरक्षा और अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा।

कोरोना के बढ़ते संकट से सरकार ने लिया बड़ा फैसला, बिहार…

सरकार ने हड़ताल को माना गैरकानूनी

कोरोना के संकट के बीच उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस चालकों की हड़ताल को सरकार ने गगैर कानूनी मानते हुए कहा है कि आपातकाल की स्थिति में हड़ताल को गैर कानूनी माना जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने बीमा का आश्वासन भी दिया है। सरकार का कहना है कि आपात से वा से जुड़े हर कर्मचारी के लिए 50 लाख का बीमा कवर है जिसमें सफाईकर्मी हो चाहें एंबुलेंस चालक।

क्या सरकार के आश्वासन से निकलेगा हल ?

एंबुलेंस की रफ्तार थमने के बाद हालांकि सरकार नींद से जाग तो गई और हड़ताल पर गए एंबुलेंस चालकों को आश्वासन भी दिया है लेकिन देखना होगा कि सरकार के आश्वासन का कितना असर देखने को मिलता है और सरकार के पास क्या विकल्प होंगे अगर एंबुलेंस चालक हड़ताल जारी रखते हैं। उत्तर प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है उसे देखते हुए सरकार को इस तरह की समस्याओं से बचने की सख्त जरूरत है।

AB STAR NEWS के ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं. हमें फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो कर सकते हैं