मध्यप्रदेश में खत्म हुआ सियासी ड्रामा, शिवराज सिंह चौथी बार लेंगे सीएम पद की शपथ

शिवराज सिंह चौहान 2005 से मध्यप्रदेश की सत्ता संभाले हुए थे। लेकिन इस बार हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।

मध्यप्रदेश में पिछले करीब एक महीने से चले आ रहे सियासी संग्राम का आखिरकार आज अंत होने जा रहा है। कमलनाथ सरकार के गिरने के बाद मध्यप्रदेश की कमान एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान संभालने वाले है। भोपाल से लेकर बेंगलुरु तक चले इस सियासी ड्रामे का अंत सुप्रीम कोर्ट में जाकर ही लगभग हो चुका था। ज्योतिरादित्य सिंधिया और 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई थी। जिसके बाद राज्य की सत्ता पर एक बार फिर से बीजेपी की वापसी तय मानी जा रही थी और ऐसा हुआ भी। बीजेपी की ओर से भी मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के लिए कई नामों पर चर्चा हो रही थी। अन्य दावेदारों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम भी सामने आया। इसके अलावा प्रह्लाद पटेल और थावरचंद के नाम पर भी हुई थी चर्चा। लेकिन आखिर में मुहर शिवराज सिंह के नाम पर ही लगी। भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री के लिए शिवराज सिंह के नाम तय कर दिया है। शिवराज सिंह आज भोपाल स्थित राजभवन में रात नौ बजे शपथ लेने जा रहे है।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार

विधायकों के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने फ्लोर टेस्ट की मांग की लेकिन देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ रहे खतरे को देखते हुए विधानसभा को स्पीकर ने स्थगित कर दिया था। इसके अलावा स्पीकर ने बागी विधायकों का इस्तीफा लेने से भी इंकार कर दिया था। जिसके बाद बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और फ्लोर टेस्ट करवाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को फटकार लगाते हुए उनसे कड़े सवाल पूछे और विधायकों का इस्तीफा न लेने का कारण पूछा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद कमलनाथ सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाने के आदेश दे दिए। जिसके बाद स्पीकर ने बागी विधायकों के इस्तीफे भी स्वीकार कर लिए। विधायकों का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई। ऐसे में कमलनाथ को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा और मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिर गई।

चौथी बार शपथ लेंगे शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान 2005 से मध्यप्रदेश की सत्ता संभाले हुए थे। लेकिन इस बार हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। जिसके साथ ही मध्यप्रदेश में शिवराज के युग का अंत हो गया। लेकिन समय ने ऐसी करवट ली की एक बार फिर से शिवराज सिंह की वापसी हुई। जिसके साथ ही वो चौथी बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे है। ये ऐसा पहला मौका होगा जब मध्यप्रदेश में कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। शिवराज सिंह चौहान 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। शिवराज से पहले अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

क्या कहता है मध्यप्रदेश का राजनीतिक गणित

यकों का समर्थन भी मिल जाता है। तो ऐसे में बीजेपी के पास विधायकों की संख्या 111 हो जाएगी। जिसके चलते उपचुमध्यप्रदेश में शिवराज सिंह के शपथ लेने के बाद सियासी समीकरण लगभग महाराष्ट्र की तरह हो जाएंगे। शिवराज सिंह को भी शपथ लेने के बाद विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा। बात अगर राज्य में मौजूदा विधानसभा सीटों की करें तो राज्य में विधानसभा की 230 सीटें हैं। दो विधायकों के निधन हो जाने के बाद दो सीटें पहले सी ही खाली हैं। इसके अलावा 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद राज्य में विधानसभा की कुल 24 सीटें खाली हो गई हैं। इन सीटों पर 6 महीनें बाद चुनाव होंगे। इन चुनावों में बीजेपी को कम से कम 9 सीटें जीतनी पड़ेंगी। फिलहाल बीजेपी के पास अभी 107 विधायक हैं। बहुमत के लिए उसे 9 और विधायकों की जरुरत है। अगर बीजेपी को चार निर्दलीय विधानाव में पार्टी को 5 सीटें जीतना जरुरी होंगी। अगर भाजपा को निर्दलीय विधायकों का समर्थन नहीं मिलता है। तो उपचुनाव में बीजेपी को हर हाल में 9 सीटें जीतनी होंगी।

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