आखिर नेपाली नागरिकों पर क्यों हुआ लाठीचार्ज?

इंडो-नेपाल सीमा पर जवानों ने चटकाई लाठियां

दिल्ली से इंडो-नेपाल सीमा सोनौली के नो मेन्स रोड पर फंसे करीब 370 नेपाली नागरिकों ने लॉक डाउन की धज्जियां उड़ाई। दरअसल इन नेपाली नागरिकों ने संगठित होकर नेपाल सीमा में घुसने की कोशिश की जिसके बाद हंगामा हो गया। जिस तरह से लॉक डाउन के सख्ती से पालन के आदेश दिए गए हैं उसके बावजूद लोगों के पलायन करने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। देर रात जब इन नेपाली नागरिकों ने नेपाल में घुसने की जबरन कोशिश की तो नेपाली सशस्त्र बल के जवानों ने इन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन जब नेपाली नागरिक अपनी जिद पर अड़ गए और जबरन नेपाल में घुसने लगे तो नेपाली सशस्त्र बल के जवानों ने लाठीचार्ज कर दिया जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया। लाठीचार्ज से गुस्साए नेपाली नागरिक धरने पर बैठ गए और नेपाल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

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आखिर क्यों हुआ हंगामा ?

दरअसल 370 नेपाली नागरिक दिल्ली की रोडवेज बस से सोनौली पहुंचे थे। इन पर प्रशासन लगातार अपनी नजर बनाए हुए था। इन्हें प्रशासन द्वारा भोजन कराया गया। फिर सभी 370 नेपाली नागरिक संगठित होकर नेपाल जाने की जिद पर अड़ गए। जैसे ही इन नेपाली नागरिकों का समूह नो मेंस लैंड से आगे बढ़ा तो नेपाल के सशस्त्र बल के जवानों ने उन्हें रोका और काफी देर समझाने का प्रयास किया। उनसे कहा गया कि अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं जैसे ही कोई आदेश दिया जाता है तभी उन्हें जाने की अनुमति मिलेगी। लेकिन नेपाली नागरिक आक्रामक हो गए और जबरन जाने का प्रयास करने लगे जिसपर नेपाल के सशस्त्र बल के जवानों को इन नेपाली नागरिकों पर लाठीचार्ज करना पड़ गया। अब स्थिति और अधिक बिगड़ गई लाठीचार्ज के बाद नेपाली नागरिकों ने हंगामा शुरू कर दिया और धरने पर बैठ गए।

लाठीचार्ज पर नेपाल प्रशासन की सफाई

नेपाली नागरिकों पर लाठीचार्ज के मामले को तूल पकड़ता देख नेपाल के बेलहिया इंस्पेक्टर ईश्वरी अधिकारी को स्पष्टीकरण देना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि जब नेपाली नागरिकों ने जवानों के समझाने के बावजूद जबरन नेपाल में प्रवेश का प्रयास किया तो जवानों को बल का प्रयाग कर उन्हें रोकना पड़ा। आपको बता दें कोरोना वायरस से बचाव को लेकर भारत-नेपाल सीमा को सील किया गया है। नेपाल सरकार ने अपने देश के नागरिकों पर भी सख्ती दिखाते हुए बाहर से आकर नेपाल में प्रवेश करने पर रोक लगा रखी है। फिलहाल नेपाल सरकार के आदेश का इंतजार किया जा रहा है कि आखिर धरने पर बैठे इन नेपाली नागरिकों को प्रवेश दिया जाएगा अथवा नहीं। नेपाली नागरिकों में नेपाल सरकार के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि जब भारत से हमें जाने की अनुमति मिल गई तो आखिर हमारा ही देश हमें प्रवेश क्यों नहीं दे रहा।

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क्या ऐसे होगा लॉकडाउन का पालन ?

ये सवाल उठना लाज़िमी है क्योंकि चाहें भारत की बात करें जहां मजदूरों के पलायन का सिलसिला जारी है और चाहें नेपाल की बात करें जहां कल देर रात नेपाली नागरिकों ने अपने वतन लौटने के लिए हंगामा कर दिया ऐसे में क्या लॉक डाउन का पालन हो पा रहा है ? क्या इस तरह के उल्लंघन का खामियाजा हमें भुगतना पड़ सकता है ? इन सवालों पर विचार करने की जरूरत है क्योंकि कोरोना के वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए ही लॉक डाउन किया गया है जिससे संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके लेकिन अगर इस तरह से हम किसी एक जगह घर वापसी के लिए इकट्ठा होकर भीड़ लगाएंगे तो लॉकडाउन करने का उद्देश्य ही निरर्थक साबित हो जाएगा। नेपाल के जवानों को अपने ही देश के नागरिकों पर लाठीचार्ज करना पड़ा क्योंकि वो समझने को तैयार ही नहीं तो बल का प्रयोग करना पड़ा लेकिन इन जवानों ने तो सरकार के आदेश की अवहेलना होने से ही रोका है। लॉकडाउन का समय वो समय है जो व्यक्ति जहां है उसे वहीं सुरक्षित रहना है क्योंकि घर वापसी की जिद कई लोगों पर भारी पड़ सकती है। सरकार हर मुमकिन प्रयास कर रही है हर सुविधा मुहैया कराने की ऐसे में हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम अपनी और देश की सुरक्षा के लिए अपने ही स्थान पर रूकें और कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने से बचें।

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