कमल हासन ने लॉकडाउन को बताया पीएम की दूसरी बड़ी गलती

ओपन लेटर लिखकर पीएम मोदी के फैसलों पर उठाए सवाल

देश में कोरोना महामारी की जंग लड़ रहे पूरे देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा विश्वास है कि वो उनकी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे और वाकई पीएम मोदी देश के लिए हर जरूरी कदम उठा भी रहे हैं। जिस तरह जनता कर्फ्यू के आह्वान पर लोगों ने प्रधानमंत्री का सम्मान किया और निर्धारित समय पर एकजुट होकर थाली, ताली और शंख-घंटियों की ध्वनि से इस संकट की घड़ी में अपनी एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया को दिखाया था तो वहीं 5 अप्रैल को रात 9 बजे का नज़ारा भी पीएम मोदी के आह्वान के कारण दिवाली में तब्दील हो गया। हजारों दीयों की रोशनी के बीच शंख की ध्वनि न सिर्फ एकता का परिचय दे रही थी बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देशवासियों के विश्वास और उनके प्रति सम्मान को भी प्रकट कर रही थी। जब देश पर संकट आया है तो प्रधानमंत्री हर संभव कोशिश कर रहे हैं देश के हालात को सुधारने की लेकिन समाज में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो इस वक्त प्रधानमंत्री मोदी की ताकत की सराहना करने अथवा उन्हें सुझाव देने की अपेक्षा उनके द्वारा लिए हर निर्णय को गलत ठहराकर उनकी आलोचना करने में व्यस्त हैं। साउथ के सुपरस्टार कमल हासन भी उसी फेहरिस्त में शामिल हैं, जो इस मुश्किल घड़ी में सहयोग अथवा सुझाव की जगह आलोचना में व्यस्त हैं। दरअसल कमल हासन ने उनके निर्णयों को गलत बताते हुए पीएम मोदी को एक ओपन लेटर ट्विटर पर पोस्ट किया है।

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कमल हासन का पीएम मोदी को ओपन लेटर

अभिनेता से राजनेता की कुर्सी संभालने वाले कमल हासन ने पीएम मोदी को एक ओपन लेटर लिखा है जिसमें 21 दिन के लॉकडाउन की जमकर उन्होंने आलोचना की। इतना ही नहीं तीन पन्नों के इस लेटर में कमल हासन ने लॉकडाउन को पीएम मोदी की नोटबंदी से बड़ी गलती करार दिया है। कमल हासन लिखते हैं, ‘मेरा सबसे बड़ा डर है नोटबंदी की गलती को लॉकडाउन के माध्यम से और भी बड़े स्तर पर दोहराई गई है। जिस तरह नोटबंदी के कारण गरीबों ने अपनी जमापूंजी और आजीविका को खो दिया था, उसी तरह लॉकडाउन हमें जिंदगी और आजीविका दोनों को एक साथ खोने की तरफ ले जा रहा है।’ इसके साथ ही कमल हासन ने दीप प्रज्ज्वलित करने के आह्वान की भी आलोचना की। कमल हासन लिखते हैं, ‘जहां आपके आह्वान के कारण गरीबों ने भी बालकनियों में दीए जलाए, वहीं दूसरी तरफ गरीब अपने भोजन के लिए तेल तलाश रहा है। गरीब आदमी कभी अखबार के पहले पन्ने की खबर नहीं बनता लेकिन उनका योगदान हमारे देश की आत्मा और हमारी जीडीपी के लिए अतुलनीय है ’ इसके बाद कमल हासन देश के हालात को लेकर लिखते हैं कि ‘जब भी हमें लगता है कि हमारे पास इस समस्यया को रोकने का तरीका है, आप अपने कंफर्ट-जोन में जाते हुए कोई चुनावी-कैंपेन सस्टाइल का आइडिया लेकर आ जाते हैं। ऐसा लगता है आप सिर्फ लोगों से जिम्मेदार रवैये की और पारदर्शिता की राज्य सरकारों से ही उम्मीद करते हैं। ऐसे बौद्धिक लोग जो एक उज्ज्वल भविष्य और शानदार वर्तमान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे ‘बौद्धिक लोग’ शब्द से अगर तकलीफ हुई हो तो माफ कीजिएगा क्योंकि आपकी सरकार को इस शब्द से तकलीफ है।’ इस लेटर के पोस्ट के बाद पीएम मोदी के समर्थन और विरोध में कमेंट आने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

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आलोचना नहीं सहयोग और सुझाव की आवश्यकता

देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है जिसके मद्देनजर लॉकडाउन का फैसला लिया गया। जिस लॉकडाउन की कमल हासन ने अपने पत्र में जमकर आलोचना की है, शायद उन्हें वो आंकड़े देखने की जरूरत है जो ये बयां कर रहे हैं कि सही वक्त पर अगर लॉकडाउन न होता तो बाकी देशों की तरह हमारे देश में भी संक्रमण और मरने वालों की संख्या कुछ और होती। देश के हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री का सहयोग और सुझाव के लिए अगर ये पत्र होता तो वाकई एकजुटता का भाव स्पष्ट होता लेकिन हर निर्णय की आलोचना करना मुश्किल घड़ी में जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे किसी व्यक्ति के विवेक पर प्रहार करने जैसा प्रतीत होता है।

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