पंचायत चुनाव 2020: यूपी के ढाई सौ से तीन सौ गांव हो जाएंगे गायब, जानिए क्यों

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अक्टूबर महीने में होने वाले यूपी पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां शुरु कर दी गई है । साल 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जो पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी, इस बार वह उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं की जाएगी।

नई दिल्ली: देश और राज्य की सरकार चुनने के बाद अब बारी आई है गांव की सरकार चुनने की। पचांयत चुनाव 2020 का ऐलान हो चुका है। आपके गांव के प्रधान जी, जिला पंचायत सदस्य और ब्लॉक प्रमुखों ने पिछले पांच सालों में कितना विकास कराया है, और अपने वादों पर कितना खरे उतरें हैं, इन तमाम तथ्यों के आधार पर आप मतदान करेंगे।

आपके गांव में खड़ंजा कितना बना नाली कितनी बनी हैंड पाईप कितने लगे आवास कितने दिए गए। ऐसी कई जानकारियां आप यहां से ले सकते हैं। गांव के प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य या फिर किसी भी प्रतिनिधि का पूरा ब्योरा आप ले सकते हैं।

आपको बता दें कि अक्टूबर महीने में होने वाले यूपी पंचायत चुनाव के लिए तैयारियां शुरु कर दी गई है । साल 2015 में हुए पंचायत चुनाव में जो पंचायत जिस वर्ग के लिए आरक्षित हुई थी, इस बार वह उस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं की जाएगी।

इस बार गांव की सरकार में गांव का प्रधान ओबीसी के लिए आरक्षित हो सकता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला, अनारक्षित, महिला, अन्य पिछड़ा वर्ग भी इस बार दांव आजमा सकता है।

पंचायत चुनाव 2020 में इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा है कि  तकरीबन ढ़ाईं सौ से तीन सौ नए ग्राम पंचायतों को शहरी क्षेत्र में जोड़ा जाएगा। वहीं मार्च के बाद पंचायतों की वोटर लिस्ट का पुन: आंकलन अभियान शुरू किया जाएगा।

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