17 अक्टूबर, शनिवार से शारदीय नवरात्र शुरु हो गए हैं. इन दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा का विधान है. नवरात्रि में लोग मां के दर्शन के लिए देश के कई मंदिरों में जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान मां की पूजा करने पर सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मां भक्तों के दुखों का निवारण करती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां के 52 शक्तिपीठ हैं, सिर्फ भारत में ही नहीं मां के कुछ शक्तिपीठ धाम विदेशों में भी स्थित है, इन धामों का बहुत अधिक महत्व है. आपको बता दें भगवान शिव जब माता सती के वियोग में माता सती के शव को लेकर तांडव करने लगे थे तब भगवान विष्णु ने सुर्दशन चक्र से माता सती के शव के टुकड़े कर दिए थे, माता सती के अंग और आभूषण जहां- जहां गिरे थे वो शक्तिपीठ बन गए. ऐसे में हम आपको उत्तर प्रदेश के कुछ प्रमुख मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन करने आते हैं और माता का आशीर्वाद लेकर खुशी-खुशी जाते हैं. इन मंदिरों की बहुत मान्यता है.

मां ललिता देवी मंदिर- सीतापुर के मिश्रिख के पास नैमिषधाम में मौजूद है मां ललिता देवी का भव्य मंदिर. यहां भक्तों की हर मांग पूरी होती है. नैमिष में बना चक्रतीर्थ और दधीच कुण्ड भी आकर्षण का केंद्र है. यहां मां के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं.

शैलपुत्री मंदिर- काशी नगरी वाराणसी के अलईपुर क्षेत्र में मां शैलपुत्री का मंदिर है. इस मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि नवरात्र के पहले दिन मां के दर्शन करने से सारी मनोकामना पूरी होती है. ऐसा कहा जाता है कि नवरात्र के दौरान मां के दर्शन करने से वैवाहिक कष्ट दूर हो जाते हैं. इस मंदिर में दर्शन करने के लिए भक्त एक दिन पहले से ही लाइन में लग जाते हैं. ताकि मां के दर्शन हो सकें.

तरकुलहा मंदिर- गोरखपुर स्थित तरकुलहा मंदिर का इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है. ऐसा कहा जाता है कि भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में बंधू सिंह नाम के क्रांतिकारी ने अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था. बंधू सिंह गुरिल्ला लड़ाई में माहिर थे इसलिए जब भी कोई अंग्रेज मंदिर के पास से गुजरता तो बंधू सिंह उसका सिर काटकर देवी मां के चरणों में समर्पित कर देते थे. यह देश का इकलौता मंदिर है, जहां प्रसाद के रूप में मटन दिया जाता है.

देवी पाटन मंदिर- उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित है देवी पाटन मंदिर. यहां नवरात्रि के मौके पर एक महीने तक मेले का आयोजन किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि पटेश्वरी माता अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं. मां के दर्शन के लिए यहां नवरात्रि के मौके पर लाखों की संख्या में भक्त आते हैं.

नैना देवी मंदिर, नैनीताल नैनीताल में, नैनी झील के उत्तरी किनारे पर नैना देवी मंदिर स्थित है. 1880 में भूस्‍खलन से यह मंदिर नष्‍ट हो गया था. बाद में इसे दोबारा बनाया गया. यहां सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है. मंदिर में दो नेत्र हैं जो नैना देवी को दर्शाते हैं.

ज्वाला देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच बसा है ज्वाला देवी का मंदिर. मां ज्वाला देवी तीर्थ स्थल को देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार ज्वाला देवी में माता सती की जिह्वा गिरी थी.

कामाख्या शक्तिपीठ गुवाहाटी- असम के पश्चिम में 8 कि.मी. दूर नीलांचल पर्वत पर है. माता के सभी शक्तिपीठों में से कामाख्या शक्तिपीठ को सर्वोत्तम कहा जाता है. कहा जाता है कि यहां पर माता सती का गुह्वा मतलब योनि भाग गिरा था, उसी से कामाख्या महापीठ की उत्पत्ति हुई. कहा जाता है यहां देवी का योनि भाग होने की वजह से यहां माता रजस्वला होती हैं.

करणी माता मंदिर, राजस्थान राजस्थान के बीकानेर से लगभग 30 किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर गांव देशनोक की सीमा में स्थित यह है मां करणी देवी का विख्यात मंदिर. यह भी एक तीरथ धाम है, लेकिन इसे चूहे वाले मंदिर के नाम से भी देश और दुनिया के लोग जानते हैं.

दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता कोलकाता का मां दक्षिणेश्वर काली मंदिर यहां के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. इसका निर्माण सन 1847 में शुरू हुआ था. कहते हैं जान बाजार की महारानी रासमणि ने स्वप्न देखा था, जिसके अनुसार मां काली ने उन्हें निर्देश दिया कि मंदिर का निर्माण किया जाए. उसके बाद इस भव्य मंदिर में मां की मूर्ति श्रद्धापूर्वक स्थापित की गई. सन् 1855 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ. यह मंदिर 25 एकड़ क्षेत्र में स्थित है.

अम्‍बाजी मंदिर, गुजरात यह मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित है. इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है. श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है. मां अम्बा-भवानी के शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति मां के भक्तों में अपार श्रद्धा है.

श्री महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर श्री महालक्ष्मी मंदिर विभिन्न शक्ति पीठों में से एक है और महाराष्ट्र के कोल्हापुर में स्थित है. यहां जो भी भक्‍त अपनी मनोकामना लेकर आता है मां के आशीर्वाद से वह मुराद पूरी हो जाती है. भगवान विष्णु की पत्नी होने के नाते इस मंदिर का नाम माता महालक्ष्मी पड़ा.

श्रीसंगी कलिका मंदिर, कर्नाटक- श्रीसंगी कलिका मंदिर काली मां को समर्पित है और यह कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है. यह कर्नाटक का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यहां पर मां दुर्गा के काली रूप की पूजा करने का विधान है.

दंतेश्‍वरी मंदिर, छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित है दन्तेवाड़ा का प्रसिद्ध दंतेश्‍वरी मंदिर. हसीन वादियों के लिए मशहूर यह मंदिर काफी पुराना है. ऐसी मान्यता है कि यहां सती का दांत गिरा था, जिसके कारण जगह का नाम दंतेश्वरी पड़ा. तो ये हैं मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर जहां पर श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा मां के दर्शन के लिए रहती है. आप सभी को नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं.

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